बच्चों को अनुशासित करने के 18 सूत्र

माना कि आज का युग डिजीटल युग है और बच्चों के समुचित विकास तथा उज्जवल भविष्य के लिए जरुरी है कि बच्चे डिजीटल वर्ल्ड को विस्तार से समझें, ताकि ज़माने के साथ चलना आसान बना रहे. किन्तु माता-पिता को मुख्य रूप से यह समझना बहुत जरुरी है कि इस डिजीटल वर्ल्ड में भी सफलता प्राप्त करने के लिए बच्चों को अनुशासन की शिक्षा स्नेह, प्रेम और सुरक्षा के साथ देते रहना बहुत जरूरी है। वैसे तो अनुशासन की शिक्षा सरल प्रतीत होती है। लेकिन बच्चों को अनुशासित करना कोई आसान काम नहीं है। अनुशासन की शिक्षा बच्चों को उचित तथा अनुकूल समय पर दी जाए तभी परिणाम स्थायी मिलता है। अनुशासनहीन बच्चे घर, परिवार, समाज- देश सभी के लिए बोझ बन जाते हैं। लेकिन आजकल उचित अनुशासन उसी को माना जाता है जो बच्चों को स्वतंत्रता प्रदान करते हुए समाजिक व्यवहार सिखाएं। अर्थात बच्चों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए माता-पिता या अभिभावक उसे प्रेम, सहानुभूति तथा स्नेह के सहारे धीरे-धीरे अनुशासन के मार्ग पर ले जाएँ. यदि आप भी अपने बच्चे को अनुशासित करना चाहते हैं अथवा उसके वर्तमान को सुदृढ़ कर उसके भविष्य को स्वर्णिम बनाना चाहते है, तो अनुशासन की निम्नलिखित विधियों को एक बार जरुर अपनाएं-

1) सर्वप्रथम आप अपने बच्चे के व्यक्तित्व का आदर करना सीखिए।

2) परिवार में उचित अनुशासन का वातावरण रखिए तथा बच्चों को अनुशासन की शिक्षा इस प्रकार दीजिए जो उनकी समझ के अनुकूल हो।

3) अभिभावकों को भी अपना व्यक्तित्व इस प्रकार का बनाना चाहिए जिसे देखकर बच्चे उत्साहित हों और आपके व्यक्तित्व को देखकर अपना व्यक्तित्व स्वयं निखारने की कोशिश करें।

4) बच्चों को परिवारिक तथा सामाजिक बातों की भी शिक्षा देनी चाहिए।

5) बच्चों के कार्य में आवश्यकता पड़ने पर सुझाव अवश्य देना चाहिए।

6) अनुशासनहीनता की क्रिया को प्रारंभ में ही रोक देना चाहिए।

7) माता-पिता को बच्चों की पारंपरिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए तथा उनकी अच्छी बुरी आदतों पर भी नजर रखना चाहिए।

8) बच्चों को समय –समय पर उचित कार्य के लिए प्रोत्साहन, स्नेह, प्रेम, सराहना और प्रशंसा का ईनाम देने में कंजूसी नही करना चाहिए।

9) बच्चों को दंड देना भी पड़े तो उसे ऐसा दंड देना चाहिए, जिससे उसके शरीर और दिमाग पर प्रतिकूल या नाकारात्मक प्रभाव न पड़े।

10) किसी अपराध के लिए बच्चे को इनके मित्रों या सगे संबंधियों के सामने दंड देना सर्वथा अनुचित है।

11) बच्चों को दंड देते समय उपहास की भावना मन में कभी ना रखें।

12) बच्चा अपराध या गलती क्यों किया? इसका कारण जान लेने के बाद ही बच्चे को क्षमा अथवा दंड दिया जाए, तो ज्यादा बेहतर होगा।

13)  जब बच्चा सुधर जाए तो उसे दोबारा उसकी गलतियों को याद दिला कर शर्मिंदा नहीं करना चाहिए।

14) निश्चित अपराधी को दंड देना चाहिए।

15) छोटी-छोटी भूल या गलतियों को भी अनुशासनहीनता नहीं समझाना चाहिए।

16) बच्चों को अनुशासित करने के लिए बहुत जरूरी है कि माता-पिता बच्चों को हीन भावना या द्वेष से गस्त ना होने दें।

17) बच्चों को अनुशासन की शिक्षा कभी-कभी देशभक्तों, महापुरुषों तथा ईश्वर की गाथाओं को सुनाकर भी देनी चाहिए।

18) अगर बच्चों को आप टीवी, मोबाइल, इंटरनेट आदि की अन्यथा आदत नही लगने देना चाहते हैं तो सबसे पहले आप (माता –पिता) इसकी आदत से दूर रहने का प्रयास कीजिए, क्योंकि आपका बच्चा सबसे पहले जो भी चीज जीवन में सीखता है, वह अपने माता-पिता को ही देखकर सीखता है.

अर्थात अनुशासनरूपी वृक्ष की ठंडी छांव तले पलने- बढ़ने वाला बच्चा ही घर- परिवार, समाज, राष्ट्र आदि के लिए एक श्रेष्ठ नागरिक सिद्ध होता हैं। इसलिए आप भी अपने बच्चों को अनुशासित कीजिए. उसके व्यक्तित्व को निखारने और उसे देश का एक आदर्श नागरिक बनने का मौका दीजिए।

तस्वीर -हमारे सप्तरंग स्टूडियो (आर्टिस्ट - रश्मि पाठक)

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