बात सिर्फ सलीके की है
कल मैं अनीता के घर गई तो देखी कि अनीता किचन में सब्जी बना रही है. मुझे आया हुआ देखकर वो जल्दी से चूल्हे का आँच कम करके और हाथ धो कर मेरे पास आकर बैठ गई. उसके हाथ पानी से भीगे हुए थे, इसलिए मैंने उसे हाथ पोछ लेने को कहा. इस पर उसने तुरंत वहीं पास की खिड़की में लगे पर्दे में हाथ पोछ लिया और मुझसे बात करने लगी. लेकिन मुझे यह बड़ा अजीब सा लगा.
ऐसे ही एक दिन अपने बगल के पड़ोसी का बेटा बिट्टू खेलकूद कर शाम को घर आया तो उसकी मम्मी ने उसे हाथ पाँव धो लेने को कहा. बिट्टू हाथ- पाँव धोकर बाथरूम से निकला और एक सरसरी निगाह से उसने इधर उधर तौलिया ढूंढा. तौलिया नहीं मिला तो खटिया पर रखे छोटी बहन के फ्रॉक से ही उसने हाथ- पाँव पोछ लिया.
पुष्पा जी अक्सर कहीं बाहर जाते वक्त रुमाल लेना भूल जाती है. ऐसी स्थिति में अगर बाहर किसी होटल में खाना पड़ जाता है तो खाने के बाद हाथ में उन्हें अपनी साड़ी के आंचल से ही पोछना पड़ता है.
देखा जाए तो करीब-करीब हर घर में ऐसा ही होता है, यानि की घर का कोई न कोई सदस्य इस प्रकार की आदतों का शिकार होता है. हाथ पोछने के लिए अगर तौलिया नहीं मिलता है तो फट से खिड़की या दरवाजे पर लगे परदों से या इधर उधर पड़े किसी के कपडे में लोग हाथ- मुंह पोछ लेते हैं. अब आप ही बताइए क्या यह कोई अच्छी आदत है? फिर भी ना जाने क्यों कुछ लोग आलस के कारण तौलिया नहीं ढूंढते हैं या बाहर जाते वक्त रुमाल लेना भूल जाते हैं. परदों मैं हाथ पोछने से परदे गंदे हो जाते हैं. गंदे परदे से घर की सारी शोभा बिगड़ जाती है. इधर उधर पड़े किसी के कपड़े में हाथ पोंछ लेने से कपड़े भी गंदे हो जाते हैं, जिसके कारण उसे कहीं बाहर पहन कर जाने में अजीब सा लगता है. इसलिए परदों मैं या इधर उधर पड़े किसी के कपड़ों में कभी भी हाथ मुंह नहीं पोछना चाहिए.
हाथ- मुंह पोछने के लिए एक नियत अथवा निश्चित स्थान पर तौलिया रखना चाहिए. कुछ लोगों की यह खास आदत होती है कि वह मुंह- हाथ पोछ कर तौलिया इधर- उधर फेंक देते है. इधर- उधर तौलिया रख देने से दोबारा हाथ पोछने के लिए तौलिया ढूंढने में काफी दिक्कत होती है.इसलिए अगर सुविधा और सामर्थ्य हो तो घर में कम से कम तीन चार तौलिये अवश्य रखें. इन तौलियो को ड्राइंग रूम, बेडरूम, डाइनिंग रूम, बाथरूम आदि में एक निश्चित स्थान पर रखें. ताकि वहां पर जिस वक्त, जिसको भी उसकी जरूरत हो उसका उपयोग वह कर सके.घर के प्रत्येक छोटे-बड़े सदस्य को परदों मे या इधर उधर रखें कपड़ों में हाथ मुंह पोछने के लिए मना करें. बाहर जाते वक्त अपने पास रुमाल अवश्य रखिए. बच्चों को भी स्कूल जाते वक्त रुमाल अवश्य दीजिए. यदि बच्चे बहुत छोटे हैं तो उसके स्कूल बैग में रूमाल रख दिया कीजिए. ताकि स्कूल में लंच करने के बाद वह हाथ अपने शर्ट की बांह में या स्कर्ट में ना पोछे.
चूंकि ये हमारे दैनिक जीवन के बहुत ही सामान्य तौर तरीके हैं. फिर भी इन तौर- तरीकों को सही रूप में अपनाकर हम अपनी जिंदगी को व्यवस्थित रूप दे सकते हैं, तो इन्हें अवश्य अपनाना चाहिए.
तस्वीर -सप्तरंग स्टूडियो से (आर्टिस्ट -रश्मि पाठक )

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