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रंग भी हमारे व्यक्तित्व व मूड को प्रभावित करते हैं

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बहुत अच्छा से ना सही,  लेकिन कुछ हद तो आपको भी पता होगा कि रंग भी हमारे व्यक्तित्व व मूड को प्रभावित करते हैं.कुछ ख़ास प्रोफेशन में तो खास रंग के ही कपड़े (ड्रेस कोड) पहनने होते हैं. उदाहरण के तौर पर डॉक्टर सफेद कोट अथवा एप्रोन पहनते हैं तो वकील काला कोट ही पहनते हैं. पुलिस खाकी रंग पहनते हैं. कई विशेषज्ञों ने अपने शोध के आधार पर यह प्रमाणित कर दिया है कि अलग-अलग रंगों का प्रभाव मानव के दिमाग पर अलग-अलग पड़ता है. जैसा प्रभाव इन रंगों का हमारे दिमाग पर पड़ता है ,वैसा ही प्रभाव हमारे मूड पर पड़ता है.यानि की रंग भी हमारे मूड को प्रभावित करते हैं। हमारे दिल और दिमाग में उठने वाले सकारात्मक और नकारात्मक भाव के लिए काफी हद तक ये रंग भी जिम्मेदार होते हैं. मन के चलिए की हमारे व्यक्तित्व पर इन रंगों का गहरा प्रभाव रहता है. आइये इन रंगों के बारे में विस्तार से जाने कि कौन -सा रंग हमारे व्यक्तित्व और मूड  को किस प्रकार प्रभावित करता है- लाल रंग हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाने और मूड को खुशनुमा बनाये रखने में अहम भूमिका निभाता है. इसे ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के साइकोलॉजिस्ट डॉ. ब्रिवर ने लगभग एक हज...

बच्चों में सौंदर्य की भावना जगाने के लिए जाने 7 महत्वपूर्ण बातें

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  आप अपने दैनिक जीवन में बच्चों से जुड़े कुछ दृश्य प्राय: देखते होंगे. जैसे की पड़ोसन की बच्ची की नाक बह रही है और वह बार-बार अपने फ्रॉक के कोने से नाक पोंछ रही है. कोई बच्चा अपने हाथ के बड़े हुए गंदे नाखूनों को दांत से कुतर रहा है. क्लास के बेंच पर बैठी छोटी-सी बच्ची एक हाथ से कॉपी पर कुछ लिख रही है, तो दूसरे हाथ से सर के बाल खुजा रही है. बच्चा बाहर से धूल मिट्टी में खेल कर आया और गंदे पांव से ही बिस्तर पर चढ़ गया या सोफे पर पसर कर टीवी देखने लगा. यह सारे दृश्य तो बच्चों की साफ सफाई से संबंधित हुए. बच्चों से संबंधित कुछ और बातें हैं जो आप अपने आसपास के माहौल में जरुर देखते होंगे. जैसे कि आप अपने घर में फूल-पौधें लगाएं हुई हैं , कभी आप अपने बेटे को इन फूल-पौधों में पानी डाल देने को कहती हैं तो आपका बेटा तुनककर बोलता है- "ओहो मम्मी मेरे पास फुर्सत नहीं है , इन बेकार के कामों के लिए. मैं तो अभी खेलने जा रहा हूं." जब कभी आप अपने बच्चों को किसी महापुरुष की कहानी सुनाना चाहती हैं तो आपका बच्चा हीमैन , सुपरमैन की कहानी सुनाने की फरमाइश करता है. और अभी के डिजीटल युग में तो बच्चे...

बरसात में पनपने वाले कीड़े मकोड़ों से छुटकारा पाने के उपाय

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  दो दिन पहले की ही बात है. मेरी पड़ोसन नेहा जी का छोटा बेटा दीपू इस लॉक डाउन में घर में ही अपनी छोटी बहन पीहू के साथ खेल रहा था. खेलते–खेलते अचानक ही उसके शरीर पर खुजली शुरू हो गई और हाथ–पाँव में लाल–लाल चक्कते होने लगे. नेहा जी ने घबड़ाते हुए मुझे फोन किया और उन्होंने दीपू के बारे में पूरी जानकारी दिया. मैं तुरंत होमियोपैथी मेडिसिन लेकर उनके घर गई. उनके घर के अंदर–बाहर के वातावरण का पूर्ण अवलोकन करने के पश्चात् मुझे तुरंत पता चल गया कि दीपू को कोई बरसाती कीड़ा खिड़की से आकर काट लिया है. लेकिन होमियोपैथी मेडिसिन लेने के बाद दीपू जल्दी ही ठीक हो गया. जो बात दीपू के साथ हुई, वैसी घटनाएँ अथवा समस्या बरसात के मौसम के शुरू होते ही शुरू हो जाती है. या यूँ कह लीजिए की बरसात का मौसम आते ही घर से लेकर पास–पड़ोस सभी जगहों पर चींटी, कॉक्रोच, मक्खी, झींगुर, दीमक, मच्छर आदि का आना एक ऐसी मुसीबत का रूप धारण कर लेती है, जिससे निजात पाने के लिए घर के बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक अपनी राय ही नही देने लगते हैं, बल्कि इसके प्रकोप से बचने के लिए अपने – अपने तरीके भी आजमाने लगते हैं. भाई क्यों नही पूरा घर इन ...