बच्चों में सौंदर्य की भावना जगाने के लिए जाने 7 महत्वपूर्ण बातें

 


आप अपने दैनिक जीवन में बच्चों से जुड़े कुछ दृश्य प्राय: देखते होंगे. जैसे की पड़ोसन की बच्ची की नाक बह रही है और वह बार-बार अपने फ्रॉक के कोने से नाक पोंछ रही है. कोई बच्चा अपने हाथ के बड़े हुए गंदे नाखूनों को दांत से कुतर रहा है. क्लास के बेंच पर बैठी छोटी-सी बच्ची एक हाथ से कॉपी पर कुछ लिख रही है, तो दूसरे हाथ से सर के बाल खुजा रही है. बच्चा बाहर से धूल मिट्टी में खेल कर आया और गंदे पांव से ही बिस्तर पर चढ़ गया या सोफे पर पसर कर टीवी देखने लगा. यह सारे दृश्य तो बच्चों की साफ सफाई से संबंधित हुए.

बच्चों से संबंधित कुछ और बातें हैं जो आप अपने आसपास के माहौल में जरुर देखते होंगे. जैसे कि आप अपने घर में फूल-पौधें लगाएं हुई हैं, कभी आप अपने बेटे को इन फूल-पौधों में पानी डाल देने को कहती हैं तो आपका बेटा तुनककर बोलता है- "ओहो मम्मी मेरे पास फुर्सत नहीं है, इन बेकार के कामों के लिए. मैं तो अभी खेलने जा रहा हूं." जब कभी आप अपने बच्चों को किसी महापुरुष की कहानी सुनाना चाहती हैं तो आपका बच्चा हीमैन, सुपरमैन की कहानी सुनाने की फरमाइश करता है. और अभी के डिजीटल युग में तो बच्चे सीधे मोबाइल पर अपनी पसंद का गेम या वीडियो लगाकर देखने लगते हैं.

आज के अधिकांश बच्चों में जो यह सारी बातें देखने को मिलती हैं, उससे साफ पता चलता है कि बच्चों में धीरे-धीरे सौन्दर्य की भावना खत्म होती जा रही है. यूं तो बच्चों में सौन्दर्य की भावना कम होने के कई कारण है पर सबसे बड़ा कारण है माता-पिता का अति व्यस्त होना. आजकल अधिकांश महिलाएं भी बच्चों पर पूरा ध्यान नहीं दे पाती हैं, क्योंकि वह भी नौकरी करने लगी है. शाम को जब वह थक कर ऑफिस से आती है, तो जैसे-तैसे घर के काम निपटा कर बच्चों को होमवर्क करवा देती है. कई माँ तो ये महत्वपूर्ण काम भी ट्यूटर के भरोसे पर छोड़ देती हैं आजकल. आदतन अगर बच्चा जिज्ञासा पूर्ण प्रश्न पूछता है तो माँ उबकर उसे डांट देती है. बच्चा डर के चुप हो जाता है. ऐसी स्थिति में बच्चों का बौद्धिक विकास कुंठित हो जाता है, अगर आप चाहती हैं कि आपके बच्चे का बौद्धिक विकास सही ढंग से हो तथा उसमें जीवन के प्रति बचपन से ही सौंदर्य की भावना जगे, तो बहुत जरूरी है कि आप घर-गृहस्थी तथा नौकरी के बीच सामंजस्य रखते हुए अपने बच्चों के लिए इतना समय निकालें कि उसके बौद्धिक विकास में अपना सहयोग दे सकें.

 हर बुद्धिजीवी व्यक्ति को पता है कि बौद्धिक विकास से ही व्यक्तित्व विकास होता है, किंतु किसी बच्चे का बौद्धिक विकास तब तक सही ढंग से नहीं हो सकता जब तक कि उसमें सौंदर्य की भावना ना हो, इसीलिए बच्चों में सौंदर्य की भावना जगाने का बराबर प्रयास करते रहना चाहिए. आज मैं आपको इसके लिए 07 महत्वपूर्ण बातें बताने जा रही हूँ-

(1) सबसे पहले तो आप अपने बच्चे को शारीरिक स्वच्छता के फायदे बचपन से ही बताया कीजिए. अगर उन्हें एक बार समझ में आ गया कि साफ स्वच्छ रहने से वह सुंदर लगता है तथा मन भी खिला-खिला रहता है तो वह स्वयं ही धीरे-धीरे शारीरिक स्वच्छता पर ध्यान देने लगेगा.

(2) बच्चों के अंदर सौंदर्य भावना के संस्कार उत्पन्न करने के लिए उसे पशु-पक्षियों वाले खिलौने गुड्डे-गुड़िया तो लाकर दे ही, साथ ही प्राकृतिक दृश्य तथा महापुरुषों के चित्रों से सजी पुस्तक लाकर भी दें. इन पुस्तकों में अगर चित्रों के साथ महापुरुषों की जीवनी भी हो तो और भी अच्छा होगा.

(3) बाजार में बच्चों के लिए कुछ ऐसे भी खिलौने मिलते हैं, जिन्हें जोड़-जोड़कर बच्चे नई-नई चीजों का निर्माण करना सीखते हैं. जैसे की तरह-तरह के मकान बनाना, गाड़ी बनाना, कुर्सी-टेबल बनाना आदि. इस प्रकार के खिलौनों से बच्चों का बौद्धिक विकास सही ढंग से होता है. 

(4) जब कभी आपको छुट्टी मिले या रविवार को ही यदि आप फ्री हों, तो किसी रमणीय स्थल पर पिकनिक मनाने बच्चों को घुमाने अवश्य ले जाएं. रमणीय स्थलों पर प्राकृतिक दृश्य को देखकर बच्चों को प्राकृतिक सौंदर्य का बोध होगा. आजकल तो साथ में मोबाइल भी रहता ही है, उसे वहाँ की फोटो खींचकर दें और कहें कि वो इसे देखकर स्केच बनाये और उनमे उचित रंग भरे. इस कार्य में आप भी उसकी मदद करें और अपनी रूचि दिखाएँ.

(4)अजायबघर, चिड़ियाघर, तथा संग्रहालय जैसे जगहों पर भी बच्चों को ज्ञान, विज्ञान, इतिहास, भूगोल, आदि विषयों से संबंधित बातों को व्यवहारिक रूप में सीखने का मौका मिलता है. चिड़ियाघर में बच्चे विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षियों को  आवाज निकालते हुए देखते हैं तो इसका गहरा प्रभाव पड़ता है, पक्षियों के प्रति इनका लगाव  बढ़ता है.

(5) अगर आपके बच्चे की उम्र कुछ दुर्लभ वस्तुओं एवं कलात्मक वस्तुओं को समझने लायक हो चुकी है, तो उसे अपने शहर के आस- पास के छोटे- मोटे ऐतिहासिक स्थलों को कभी-कभार दिखाने ले जाएँ और उन्हें प्राचीन बातों का महत्व समझाएँ. अपने देश की संस्कृति की ओर उनका रुझान बढ़ेगा, जो उनके भविष्य के लिए अच्छा होगा.

(6) घर में फूल-पौधे लगाने से बच्चों में सौंदर्य की भावना विकसित होती है. रंग बिरंगे फूल बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. फूल-पौधों को बढ़ता देख कर उन्हें धीरे-धीरे समझ में आने लगता है कि इन फूल पौधों में भी जीवन होता है. इसलिए इन्हें तोड़ना नहीं चाहिए. उन्हें भी हमारी तरह दर्द होगा. इस प्रकार के कोमल भाव उत्पन्न होने से बच्चे जीवन के महत्व को समझने लगते हैं. माता-पिता का एकमात्र कर्तव्य यह होता है कि वह स्वयं अपना व्यक्तित्व ऐसा बनाने की कोशिश करें कि उनका बच्चा उन्हें ही अपना आदर्श मानने लगे. अगर माता-पिता शारीरिक, घरेलू स्वच्छता का स्वयं ख्याल रखेंगे तो उन्हें देखकर बच्चे भी वैसे ही ख्याल रखने लगेंगे.

(7) अंत में मैं एक बात अवश्य कहना चाहूँगी कि बच्चों के सामने आप कम से कम मोबाइल यूज करें. ये बात सही है कि इंटरनेट, मोबाइल आदि जैसी चीजें आज के डिजीटल युग में हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य वस्तु बन गई हैं किन्तु इसे हमेशा बच्चों के सामने चलाकर अपनी कमजोरी मत बनाइए. अगर बच्चों को लेकर उनके काम के लिए बैठे हैं तो कम से कम उस वक्त तो आप मोबाइल को छोड़ ही सकते हैं, ताकि आपका पूरा ध्यान बच्चों के साथ कर रहे क्रियाकलाप पर केन्द्रित हो. 

 अत: अगर आप चाहती हैं कि आपका बच्चा जिम्मेदार और समझदार बनकर अपने व्यक्तित्व को गरिमापूर्ण बनाए तो उसमें सर्वप्रथम सौंदर्य की भावना जगाने की कोशिश करें।

-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

 तस्वीर - सप्तरंग स्टूडियो से (चित्रकार - रश्मि पाठक )

 

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

घर फूटे गंवार लूटे

बुजुर्ग हमारी धरोहर हैं

अतीत से भविष्य तक के सफर में