जो पास है वही ख़ास है


पूरब अपने कमरे में कान में इयर फोन लगाकर मोबाइल पर व्यस्त था और बगल के कमरे से उसकी छोटी चाची उसे आवाज दे रही थी. दरअसल चाची कमरें में पलंग से टकराकर गिर गयी थीं और सर पे चोट लग गयी थी. वो मदद के लिए पूरब को आवाज देती रहीं और पूरब कान में इयर फोन लगाकर अपने जर्मनी वाले दोस्त से चैट करने में व्यस्त रहा. वो तो भला हो बिट्टू का, जो अपनी छोटी -सी गेंद को पलंग के नीचे खोजने आया तो अपनी मम्मी को गिरा देखकर भागकर पूरब के पास गया और उसे खींचकर दूसरे कमरे में लेकर आया. पूरब ने जल्दी से चाचो को सौरी कहते हुए उठाया और उनकी मलहम -पट्टी किया. बाद में जब बाकि लोग घर के आये तो सारी बात बिट्टू से जानने के बाद पूरब को अच्छी -खासी डांट लगायें. 

सच पूछिए तो आज के डिजीटल वर्ल्ड में यह कोई आश्चर्य की बात नही है कि लोग पास के लोगों को नजरंदाज करने लगे हैं और इंटरनेट के माध्यम से मिलने वाले दूर के लोगों को पास समझने लगे हैं. मैं इस बात से हरगिज इंकार नही करती हूँ कि इंटरनेट ने कई बिछुड़े हुए लोगों को मिलाने में अहम भूमिका निभाई है. सोशल मीडिया पर कई अच्छे मित्र व् शुभचिंतक भी लोगों को मिले हैं. कई लोगों के जीवन के एकाकीपन को भी सोशल मीडिया ने दूर किया है. पढाई -लिखाई , बिजनेस , ऑफिस , खरीद -बिक्री आदि कई कामों को इसने आसान बनाया है. किन्तु आज के आधुनिक परिवेश में अधिकांश लोग ऐसे हो गये हैं जो अपने आस -पड़ोस के लोगों की तो बात ही मत कीजिये, क्योंकि लोग तो अब अपने घर के लोगों से भी दूरी खींचने लगे हैं. मोबाइल हाथ में लेकर देश -विदेश में बातें करेंगे, उनके हालचाल पूछेंगे, पर अपने घर में कौन बीमार है, किस बच्चे को पढाई में मदद की जरुरत है या किसने किस कारण से रात में या दिन में खाना नही खाया ? इस बात को जानने की उन्हें जरा -सी भी फुर्सत नही है. 

ऐसे लोगों को आज की तारीख में कोई बात सिखाना भी मूर्खता ही है , क्योंकि आप इनको ज्यादा सिखाएं तो ये आपसे ही दूर   भागने लगेंगे. कहीं ना कहीं आज की तारीख में अधिकांश घरों में बच्चे से लेकर बूढ़े तक सोशल मीडिया के मोह जाल में ऐसे फंसे हुए हैं कि घर -परिवार में इसका कुप्रभाव साफ़ दिखाई देने लगा है. एक कमरे में अगर चार लोग बैठे हैं तो सभी अपने -अपने मोबाइल पर वर्ल्ड टूर करते हुए दिखाई देते हैं. घर दूध, पानी , चीनी क्या है और क्या खत्म है, इसकी जानकारी हो या ना हो पर देश -विदेश में कौन किसको लूट रहा है, इसकी जानकारी लगभग सबको रहती रहती है. 

इस लेख के माध्यम से मैं सिर्फ इस बात को कहना चाहती हूँ कि अगर आप भी सोशल मीडिया की दुनिया में उलझकर अगर अपने आस -पास के लोगों को अपने जीवन से दूर करते जा रहे हैं तो आपको तुरंत सम्भलने की जरुरत है, क्योंकि जो पास है, वही ख़ास है. दूर वाले तो जब आयेंगे तब आयेंगे आपके सुख -दुःख में. पहले तो जो पास है, वही आपके दुःख में आपका साथ देगा और आपकी खुशियों का साथी बनेगा. 

टिप्पणियाँ

  1. आज के परिवेश को दर्शाती बेहतरीन रचना

    बहुत ही सारगर्भित लेख अनुराधा जी।
    🙏🏻🙏🏼

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  2. यह गंभीर विषय है। आपने बहुत ही सकारात्मक रूप प्रस्तुत किया है। बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।👏👏👏

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  3. डिजिटल वर्ल्ड की जटिलता हर कहीं व्यप्त है। आज के परिवेश की समस्या और इसे समझने की प्रक्रिया बहुत जरूरी है। सरल भाषा मे एक बेहतरीन कथा लेखन से सकारात्म अभिव्यक्ति का सृजन 👍👍

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