पुस्तक प्रेमी हैं, तो जरुर बनाइए एक होम लाइब्रेरी
आज के डिजीटल वर्ल्ड में ये बात सच है कि लोगों के बीच बुक्स का क्रेज धीरे –धीरे खत्म होता जा रहा है, किन्तु इसे पूरा सत्य मानना भी सही नही है, क्योंकि आज के डिजीटल युग में भी काफी बड़ी संख्या में ऐसे पुस्तक प्रेमी हैं, जो अपने पसंद के लेखकों की पुस्तके खरीदते भी हैं और उन्हें सहेज कर रखते भी हैं. आज का मेरा ये लेख ऐसे ही पुस्तक प्रेमियों के लिए है.
लाइब्रेरी यानि की पुस्तकालय वो जगह है जहां विद्या व ज्ञान की देवी सरस्वती से हमारी साक्षात मुलाकात होती है. अब आप ही सोचिए कि जिस जगह पर हमारी मुलाकात ज्ञान की देवी से होती होगी वह जगह कितना पवित्र एवं अनमोल होगा. अगर आपको ज्ञान की देवी से मिलकर ज्ञान हासिल करने की इच्छा हो तो आप प्रतिदिन जरूर लाइब्रेरी जाइए. किंतु हो सकता है कि किसी कारणवश आप प्रतिदिन लाइब्रेरी जाने में स्वयं को असमर्थ पाते होंगे, यानि की हो सकता है कि लाइब्रेरी आपके घर से बहुत दूर हो या फिर सदस्यता शुल्क बहुत ज्यादा हो. अपनी बढ़ती हुई आयु तथा स्वास्थ्य समस्या के कारण भी आप लाइब्रेरी नही जा पाते हों. कई बार ऐसा भी होता है कि आपकी पसंद की पुस्तकें लाइब्रेरी में बहुत कम हों. लेकिन इसके लिए आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है. क्योंकि बड़ी ही आसानी से आप अपने घर में एक छोटी-सी लाइब्रेरी बनाकर हर दिन ज्ञान की देवी से मिल सकते हैं.
घर में छोटी-सी लाइब्रेरी बनाना बहुत ही आसान है. इसके लिए आपमें सिर्फ लगन होनी चाहिए. साथ ही पढ़ाई में भी रुचि होनी चाहिए. तो फिर चलिए एक छोटी –सी लाइब्रेरी बनाने के लिए कुछ ख़ास बातों पर ध्यान दें-
(1)सबसे पहले आप घर में छोटी-सी उस जगह का चुनाव कीजिए जो एकांत में हो. एकांत से मेरा अर्थ है, ऐसे स्थान का चुनाव कीजिए, जहाँ पर एक यूजफुल लाइब्रेरी डेवलप करने से घर के किसी और सदस्य को कोई दिक्कत न हो.
(2) अगर पुस्तकों को रखने के लिए रैक हो तो कोई बात नहीं. किंतु अगर रैक न हो तो लकड़ी की एक अलमारी खरीद लीजिए.अगर आप विद्यार्थी तो आप सबसे पहले अपनी लाइब्रेरी में पूर्व कक्षाओं की उपयोगी पुस्तकें करीने से सजाकर रखिए.अब आप सोच रहे होगे कि लाइब्रेरी में पूर्व कक्षा की पुस्तकों का क्या काम? शायद आपको पता नहीं की आज का युग कड़ी प्रतियोगिता का युग है. आज के युग में एक छोटी-सी नौकरी पाने के लिए भी कड़े साक्षात्कार से गुजरना पड़ता है. आज अधिकारी पद की नौकरी के साक्षात्कार में भी कुछ ऐसे सवाल पूछे जाते हैं जिसे आप सातवीं-आठवीं कक्षा में पढ़े होगे. अक्सर ऐसे सवालों का जवाब तेज से तेज विद्यार्थी भी नहीं दे पाते हैं, क्योंकि वह इतने नीचे की कक्षा के कई सवाल भूल चुके होते हैं. इसलिए अपनी पूर्व कक्षाओं की पुस्तकों को कभी बेचने का प्रयास मत कीजिए. अगर कोई आपसे पूर्व कक्षा की पुस्तक पढ़ने को मांगे भी तो सिर्फ उसे ही दीजिए, जो आपकी पुस्तकों को पढ़ने के बाद ठीक समय पर लौटा दे.
आप विद्यार्थी होने के नाते सामान्य ज्ञान तथा विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिता से संबंधित पुस्तक को खरीदना शुरू कर दीजिए. अगर आप जेबखर्च में से पैसे बचाकर पुस्तकें खरीदेंगे तो और भी अच्छी बात होगी. इन पुस्तकों का नियमित रूप से अध्ययन कीजिए. अगर आपके घर में अखबार आता हो तो उसमें से देश-विदेश में होने वाली मुख्य घटनाओं के समाचार का कतरन काट कर एक फाइल में रखा कीजिए. कभी-कभी सामान्य ज्ञान परीक्षा में देश-विदेश की किसी ऐसी घटना के बारे में सवाल पूछ लिया जाता है, जिसके बारे में आप किसी प्रतियोगिता संबंधी पत्रिका में भी नहीं पढ़े होगे. ऐसी स्थिति में अखबार से काटा हुआ यह कतरन बड़ी उपयोगी सिद्ध होता है.
(3) अपनी होम लाइब्रेरी में अपनी पसंद की साहित्यिक पुस्तकों के साथ-साथ स्वास्थ्य सम्बन्धी पुस्तकें भी अवश्य रखिए. ऐतिहासिक, पौराणिक अथवा धार्मिक पुस्तकों को अपनी लाइब्रेरी में जरुर जगह दें. स्वस्थ मनोरंजक पुस्तकें भी अपनी लाइब्रेरी में अवश्य रखें, ताकि जब ज्ञान पूर्ण अध्ययन से मन थोड़ा उब जाए तो मनोरंजक पुस्तकों को पढ़कर आप दिमाग थोड़ा हल्का कर सकें. किंतु मनोरंजक पत्रिकाओं की बात चली है, तो इसका मतलब यह हरगिज नहीं है कि आप अपनी लाइब्रेरी में फूहड़ एवं अश्लील पुस्तकों को स्थान दें. केवल स्वस्थ मनोरंजन पुस्तकें लाइब्रेरी में रखिए. ताकि परिवार के दूसरे सदस्यों को भी कभी आपकी लाइब्रेरी से लेकर कोई बुक पढ़ना हो तो आपको ये अश्लील अथवा फूहड़ पुस्तकों को यहाँ –वहाँ छुपाना न पड़े.
(4 ) अगर घर में सुविधा या आर्थिक सामर्थ की कमी हो, तो आप पांच-सात मित्रों के साथ मिलकर भी एक लाइब्रेरी बना सकते हैं. किंतु इसके लिए जरूरी है कि सभी मित्र पुस्तक अध्यन में रुचि रखते हो. आप सभी मित्र कुछ राशि हर महीने जमा करके अच्छी-अच्छी पुस्तकें खरीद कर अपनी छोटी सी लाइब्रेरी को बड़ा रूप भी दे सकते हैं. इस प्रकार से लाइब्रेरी बनाकर नियमित रूप से अध्ययन करने से जीवन में लाभ ही लाभ होगा. तो फिर देर किस बात की है, जुट जाइए एक छोटी-सी होम लाइब्रेरी बनाने में.
लाइब्रेरी यानि की पुस्तकालय वो जगह है जहां विद्या व ज्ञान की देवी सरस्वती से हमारी साक्षात मुलाकात होती है. अब आप ही सोचिए कि जिस जगह पर हमारी मुलाकात ज्ञान की देवी से होती होगी वह जगह कितना पवित्र एवं अनमोल होगा. अगर आपको ज्ञान की देवी से मिलकर ज्ञान हासिल करने की इच्छा हो तो आप प्रतिदिन जरूर लाइब्रेरी जाइए. किंतु हो सकता है कि किसी कारणवश आप प्रतिदिन लाइब्रेरी जाने में स्वयं को असमर्थ पाते होंगे, यानि की हो सकता है कि लाइब्रेरी आपके घर से बहुत दूर हो या फिर सदस्यता शुल्क बहुत ज्यादा हो. अपनी बढ़ती हुई आयु तथा स्वास्थ्य समस्या के कारण भी आप लाइब्रेरी नही जा पाते हों. कई बार ऐसा भी होता है कि आपकी पसंद की पुस्तकें लाइब्रेरी में बहुत कम हों. लेकिन इसके लिए आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है. क्योंकि बड़ी ही आसानी से आप अपने घर में एक छोटी-सी लाइब्रेरी बनाकर हर दिन ज्ञान की देवी से मिल सकते हैं.
घर में छोटी-सी लाइब्रेरी बनाना बहुत ही आसान है. इसके लिए आपमें सिर्फ लगन होनी चाहिए. साथ ही पढ़ाई में भी रुचि होनी चाहिए. तो फिर चलिए एक छोटी –सी लाइब्रेरी बनाने के लिए कुछ ख़ास बातों पर ध्यान दें-
(1)सबसे पहले आप घर में छोटी-सी उस जगह का चुनाव कीजिए जो एकांत में हो. एकांत से मेरा अर्थ है, ऐसे स्थान का चुनाव कीजिए, जहाँ पर एक यूजफुल लाइब्रेरी डेवलप करने से घर के किसी और सदस्य को कोई दिक्कत न हो.
(2) अगर पुस्तकों को रखने के लिए रैक हो तो कोई बात नहीं. किंतु अगर रैक न हो तो लकड़ी की एक अलमारी खरीद लीजिए.अगर आप विद्यार्थी तो आप सबसे पहले अपनी लाइब्रेरी में पूर्व कक्षाओं की उपयोगी पुस्तकें करीने से सजाकर रखिए.अब आप सोच रहे होगे कि लाइब्रेरी में पूर्व कक्षा की पुस्तकों का क्या काम? शायद आपको पता नहीं की आज का युग कड़ी प्रतियोगिता का युग है. आज के युग में एक छोटी-सी नौकरी पाने के लिए भी कड़े साक्षात्कार से गुजरना पड़ता है. आज अधिकारी पद की नौकरी के साक्षात्कार में भी कुछ ऐसे सवाल पूछे जाते हैं जिसे आप सातवीं-आठवीं कक्षा में पढ़े होगे. अक्सर ऐसे सवालों का जवाब तेज से तेज विद्यार्थी भी नहीं दे पाते हैं, क्योंकि वह इतने नीचे की कक्षा के कई सवाल भूल चुके होते हैं. इसलिए अपनी पूर्व कक्षाओं की पुस्तकों को कभी बेचने का प्रयास मत कीजिए. अगर कोई आपसे पूर्व कक्षा की पुस्तक पढ़ने को मांगे भी तो सिर्फ उसे ही दीजिए, जो आपकी पुस्तकों को पढ़ने के बाद ठीक समय पर लौटा दे.
आप विद्यार्थी होने के नाते सामान्य ज्ञान तथा विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिता से संबंधित पुस्तक को खरीदना शुरू कर दीजिए. अगर आप जेबखर्च में से पैसे बचाकर पुस्तकें खरीदेंगे तो और भी अच्छी बात होगी. इन पुस्तकों का नियमित रूप से अध्ययन कीजिए. अगर आपके घर में अखबार आता हो तो उसमें से देश-विदेश में होने वाली मुख्य घटनाओं के समाचार का कतरन काट कर एक फाइल में रखा कीजिए. कभी-कभी सामान्य ज्ञान परीक्षा में देश-विदेश की किसी ऐसी घटना के बारे में सवाल पूछ लिया जाता है, जिसके बारे में आप किसी प्रतियोगिता संबंधी पत्रिका में भी नहीं पढ़े होगे. ऐसी स्थिति में अखबार से काटा हुआ यह कतरन बड़ी उपयोगी सिद्ध होता है.
(3) अपनी होम लाइब्रेरी में अपनी पसंद की साहित्यिक पुस्तकों के साथ-साथ स्वास्थ्य सम्बन्धी पुस्तकें भी अवश्य रखिए. ऐतिहासिक, पौराणिक अथवा धार्मिक पुस्तकों को अपनी लाइब्रेरी में जरुर जगह दें. स्वस्थ मनोरंजक पुस्तकें भी अपनी लाइब्रेरी में अवश्य रखें, ताकि जब ज्ञान पूर्ण अध्ययन से मन थोड़ा उब जाए तो मनोरंजक पुस्तकों को पढ़कर आप दिमाग थोड़ा हल्का कर सकें. किंतु मनोरंजक पत्रिकाओं की बात चली है, तो इसका मतलब यह हरगिज नहीं है कि आप अपनी लाइब्रेरी में फूहड़ एवं अश्लील पुस्तकों को स्थान दें. केवल स्वस्थ मनोरंजन पुस्तकें लाइब्रेरी में रखिए. ताकि परिवार के दूसरे सदस्यों को भी कभी आपकी लाइब्रेरी से लेकर कोई बुक पढ़ना हो तो आपको ये अश्लील अथवा फूहड़ पुस्तकों को यहाँ –वहाँ छुपाना न पड़े.
(4 ) अगर घर में सुविधा या आर्थिक सामर्थ की कमी हो, तो आप पांच-सात मित्रों के साथ मिलकर भी एक लाइब्रेरी बना सकते हैं. किंतु इसके लिए जरूरी है कि सभी मित्र पुस्तक अध्यन में रुचि रखते हो. आप सभी मित्र कुछ राशि हर महीने जमा करके अच्छी-अच्छी पुस्तकें खरीद कर अपनी छोटी सी लाइब्रेरी को बड़ा रूप भी दे सकते हैं. इस प्रकार से लाइब्रेरी बनाकर नियमित रूप से अध्ययन करने से जीवन में लाभ ही लाभ होगा. तो फिर देर किस बात की है, जुट जाइए एक छोटी-सी होम लाइब्रेरी बनाने में.

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