भोज्य पदार्थों में मिलावट की जांच स्वयं करे


भोज्य पदार्थों में मिलावट की समस्या राष्ट्रीय स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा होती जा रही है। हमारे देश के कुछ भ्रष्टचारी व्यापारी मिलावट के द्वारा धनी एवं निर्धन दोनों का समान रूप से शोषण कर रहें हैं। रहन-सहन और बढ़ती महंगाई के कारण उपभोक्ता वस्तु के मूल्य पर विशेष ध्यान देता है और इस बात से भी व्यापारियों को मिलावट करने का बढ़ावा मिलता है। रंग, स्वाद और सुगन्ध के चक्कर में पड़कर उपभोक्ता हानिकारक भोज्य पदार्थ खरीद लेता है। बढ़ी हुई कीमतों के कारण उपभोक्ता सस्ता माल खरीदना चाहता है और विक्रेता उसी हालत में सस्ता माल देता है, जब वह उसमें सस्ती वस्तु को मिला देता है। ऐसे भोज्य पदार्थों को खाने से शरीर में अनेक प्रकार की बीमारियों का जन्म होता है। कभी-कभी तो मनुष्य की जान भी चली जाती है।

            प्रयोगशालाओं में की गयी जाँचों से पता लगा है कि भोज्य-पदार्थों में मिलावट की कोई सीमा नहीं हैं। फिर भी यदि हम चाहें तो इनमें होने वाले मिलावट से काफी हद तक छुटकारा पा सकतें हैं यानि की हम भोज्य पदार्थों को कुछ घरेलू उपायों द्वारा जांच-परख कर खाने में उपयोग करें तो काफी हद तक इस जानलेवा मिलावट से बच सकते हैं। कुछ भोज्य पदार्थों को घरेलू उपायों द्वारा जांचने की विधियाँ नीचे दी जा रही हैं –

1. दूध- दूध में प्राय: पानी मिलाया जाता है अथवा उसकी मलाई निकाल ली जाती है। इसकी जांच लैक्टोमीटर से की जाती है। इसकी जांच के लिए लैक्टोमीटर से विशिष्ठ गुरुत्त्व निकाल कर  मिलाए गए पानी का अनुमान लगाया जा सकता है। शुद्ध दूध की रीडिंग प्राय: 28 से 34 के बीच होती है। दूध में यदि अंगुली डुबायी जाए और दूध अंगुली में न लगे. तो समझना चाहिए कि उसमें से मलाई निकाल ली गयी है। दूध में प्राय: यूरिया, वोशिग पाउडर, पानी, स्टार्च आदि की भी मिलावट की जाती है. इसकी रिडींग को बढ़ाने के लिए स्टार्च, शक्कर आदि मिला दिया जाता है. अगर आप  थोड़े से दूध में आयोडिन मिलाकर गर्म करे और अगर दूध का रंग नीला होने लगे तो समझ जाना चाहिए कि इसमें स्टार्च की मिलावट की गयी है। यूरिया का पता लगाने के लिए आप परखनली का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए आप एक परखनली में 5 मिलीमीटर दूध लें और उसमें 2 बूंद एल्कोहोल डालें। अगर कुछ देर बाद दूध का रंग नीला होने लगे तो समझ जाइए की दूध में यूरिया की मिलावट की गयी है।

 2. मक्खन और घी- मक्खन और घी में अक्सर वनस्पति और चर्बी का अपमिश्रण पाया जाता है। इसे जाँचने के लिए 10 धन से.मी. हाइड्रोक्लोरिक एसिड में एक चम्मच चीनी घोलें और उसमें 10 से.मी. मक्खन या घी मिलाएं। उसे एक मिनट तक हिलाएं, फिर दस मिनट तक छोड़ दें। यदि घी या मक्खन में मिलावट होगी तो मिश्रण की सतह लाल हो जाएगी।

3. आईसक्रीम- आईसक्रीम में प्राय: वॉशिंग पाउडर की मिलावट की जाती है. इसे जाँचने के लिए आप आइसक्रीम पर नींबू की कुछ बुँदे डालें, यदि बुलबुले उठने लगे तो समझ जाइए कि इसमें वॉशिंग पाउडर की मिलावट की गई है.

4.चाय की पत्ती में मिलावट- चाय पत्ती में प्राय: पपीते के बीज का ही मिश्रण मिलाया जाता है. जिसे जाँचना कठिन होता है, किन्तु काँच के पारदर्शी बर्तन में नींबू का रस लें और उसमे थोड़ी –सी चाय पत्ती डाल कर देखें,  यदि  इसका रंग हरा-पीला दिखाई दे तो पक्का है कि चायपत्ती में मिलावट नही की गयी है, किन्तु अन्य कोई रंग आने का मतलब है कि इसमें मिलावट की गयी है.

5. खाध तेल- खाध तेल में अक्सर खनिज तेल की मिलावट की जाती है। इसे जाँचने के लिए एक टेस्ट टयूब में 2 मि.ली. खाध तेल लें और उसमें उतना ही N/2  नाइट्रिक एसिड  मिलाएं। एक बर्तन में पानी गरम करें। इस गरम पानी में टेस्ट ट्यूब को होल्डर की सहायता से पकड़ कर रखें। यदि टेस्ट ट्यूब में गंदलापन दिखाई दे तो इसका अर्थ है कि खाध तेल में खनिज तेल की मिलवाट की गई है। खाध-तेल में कभी कभी आर्जीमोन मेक्सिकोन की भी मिलावट की जाती है। इसे जांचने के लिए एक टेस्ट ट्यूब में 5 मि.ली. तेल लें। इसमें थोडा-सा सान्द्र नाइट्रिक एसिड डालें। यदि खाध तेल में आरजीमोन मेक्सिकोन की मिलावट होगी, तो लाल या मटमैला भूरा रंग दिखाई देगा।

6. हल्दी पाउडर- हल्दी पाउडर में अखाध रंग में रंगा आटा या मैदा की मिलावट की जाती है। पीले अखाध रंग का पता हल्दी के घोल में कुछ बूंद हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाकर लगाया जा सकता है। इससे यह घोल लाल हो जाता है। यदि हल्दी में यह रंग होगा, तो उसी सीमा तक लाल बना रहेगा। आटा या मैदा मिले होने की जाँच आयोडीन का घोल मिलाने से हो सकता ही। ऐसी मिलावट पर घोल नीला रंग का हो जायेगा। वैसे  हल्दी की बुकनी में मिले आटे या मैदे का पता गीली अंगुली के बीच थोड़ी- सी हल्दी लेने से भी लग जाता है। इससे आटा या मैदा लुगदी के समान बन जाएगा तथा हल्दी के कण धुल जायेंगे और अंगुलियों के छोर पीले हो जाएँगे।

7. मिर्च पाउडर:  मिर्च पाउडर में प्राय: लकड़ी के रंगीन बुरादे, लाल ईंट की पिसी हुई बुकनी इत्यादि मिलायी जाती है। इसे जाँचने के लिए मिर्च पाउडर थोड़ा सा लेकर पानी में घोलें। लकड़ी के बुरादें पानी के उपर उपलाकर तैरने लगेंगे। यदि ईंट की बुकनी की मिलावट की गयी होगी तो यह तलछट में बैठ जाएगी। इसे अंगुली के स्पर्श से अनुभव किया जा सकता है।

8. हींग- हींग में विदेशी राल या गोंद की मिलावट की जाती है। शुद्ध हींग पानी में तुरंत धुल जाती है और पानी को दुधिया बना देती है। उसमें मिले विदेशी राल या गोंद के टुकड़े अंगुली के स्पर्श से आसानी से पहचाने जा सकते हैं।

9.लौंग- लौंग में से अक्सर उसका तेल निकाल लिया जाता है। इस तरह के लौंग का आकार छोटा हो जाता है तथा लौंग में सिकुड़न भी पड़ जाती है ।

10.काली मिर्च- काली मिर्च में पपीते के बीज की मिलावट की जाती है । काली मिर्च को सूप में फटकने से पपीते के बीज हल्के होने के कारण  आगे आ जाते हैं और कुछ उड़ने भी लगते हैं।पानी में डालने पर पपीते के बीज हलके होने के कारण पानी के उपर उप्लाने लगते हैं।

11. दाल- दाल में अक्सर लीडक्रोमोड की मिलावट की जाती है। इसकी जांच के लिए 5 ग्राम दाल में 5 मिली लीटर पानी मिलाकर उसमें हाइड्रोक्लोरिक एसिड की कुछ बूंदे डालने पर, यदि उसका रंग गुलाबी हो जाए तो, समझना चाहिए कि दाल में लीडक्रोमोड की मिलावट की गयी है.

12. गेहूँ का आटा- गेहूं के आटे में बहुधा मकई, ज्वार या आम की गुठली की बुकनी की मिलावट की जाती है। गेहूं के अपमिश्रित आटे को पानी से सानते समय गेहूं के शुद्ध आटे को पानी से सानते समय की तुलना में अपेक्षाकृत कम लस और चिकनापन का अनुभव होता है।

13. शहद- शहद की शुद्धता चेक करने के लिए आप एक रुई की बाती में थोड़ा- सा शहद लगाकर माचिस से जलाएं. यदि बाती में आग लग जाती है तो शहद शुद्ध है, यदि आग नही लगी तो शहद को अशुद्ध ही मानिए.
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तस्वीर - सप्तरंग स्टूडियो से (आर्टिस्ट - रश्मि पाठक)

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