सफलता प्राप्त करने के बाद का संघर्ष

 

आज आपको मेरे ब्लॉग के इस शीर्षक को पढ़ने के बाद कुछ अजीब सा लग रहा होगा। पक्की बात है कि आप सोच रहे होंगे कि भला सफलता प्राप्त करने के बाद कौन सा संघर्ष करना पड़ता है? सफलता प्राप्त करने के बाद तो बस ऐश मौज मस्ती और आराम होता है। 

लेकिन अधिकांश लोगों के साथ ऐसा नही होता है। खासकर उनके साथ तो बिल्कुल भी नहीं, जो अपनी सफलता को बरकरार रखना चाहते हैं। ये बात हम सभी जानते हैं कि सफलता समय के साथ घटती- बढ़ती रहने वाली चीज है। फिर भी जो लोग चाहते हैं कि उनका नाम , उनकी पहचान अथवा उनकी कामयाबी समय के अनुरूप बनी रहे, तो इसके लिए उनको कठिन संघर्ष करना पड़ता है। क्योंकि वो सिर्फ़ आसपास के लोगों की नजर में ही नहीं बल्कि दूर दराज के लोगों के बीच भी अपनी खास जगह बना लेते हैं। अब उनके इन्हीं शुभचिंतकों के बीच कुछ ईर्ष्यालु शत्रु भी दोस्त, परिचित या फिर रिश्तेदार के रूप छुपे होते हैं, जो इस बात की ताक में लगे रहते हैं कि कब उनसे कोई भूल हो और वो उनकी खिंचाई करें। ऐसे लोग आपके जीवन में आपको नीचा दिखाने का कोई भी मौका नही चुकते हैं। 

दूसरी तरफ देखा जाए तो अगर आप व्यवसायीं हैं , तो आपसे आपके कस्टमर उम्दा से उम्दा प्रोडक्ट की अपेक्षा पाल लेते हैं और अगर आप नौकरी में सफलता प्राप्त किए हैं तो आपके बॉस आपसे बेहतरीन कार्यों की अपेक्षा पाल लेते हैं। आपकी छोटी- सी गलती भी सबके नजर में तुरंत आ जाती है।

कई बार तो ऐसा भी होता है कि खुद व्यक्ति ही सफलता प्राप्त करने के बाद जमीन पर रहकर गुरूर के आकाश में उड़ने लगता है। अपने सामने सबको छोटा समझने की भूल करने लगता है। ऐसी स्थिति में धीरे- धीरे उसके अपने भी साथ छोड़ देते हैं। ऐसा व्यक्ति जीवन में एक दिन अकेला रह जाता है। 

इसलिए मान के चलिए कि सफलता प्राप्त करने के बाद आपके संघर्ष का सिर्फ रूप बदलता है, संघर्ष जारी ही रहता है। इसलिए अपने संघर्ष को ताउम्र इंजॉय कीजिए । जीवन में किसी भी सफलता पर गुरूर अर्थात् अभिमान मत कीजिए। लोगों के बीच अपनी सफलता की गरिमा को बनाए रखने के लिए कभी -कभी अपने व्यक्तित्व का भी मूल्यांकन करते रहिए 😊

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