फर्स्ट इम्प्रेशन' का महत्व कितना?

शोभा शादी करके जब ससुराल आई तो उसे पहले दिन ही अपनी सास का वो रूप देखने को मिला, जिसे वो चाहकर भी नहीं भूल पाती है. हुआ यूं कि जिस दिन शोभा ससुराल आई, उस दिन उसकी सास अपनी देवरानी से किसी बात पर बुरी तरह झगड़ पड़ी. बात छोटी-सी ही थी, किंतु शोभा की सास अपने क्रोद्ध  पर क़ाबू न रख सकीं. नतीजा यह हुआ कि पहले दिन से ही शोभा के मन में अपनी सास के लिए कड़वाहट भर गई तथा वह अपनी सास से डरने भी लगी. वैसे उसकी सास का उसके साथ बहुत अच्छा व्यवहार रहता है.

फिर भी, ससुराल में क़दम रखते ही पहले दिन वो सास का जो स्वभाव देख चुकी है, उसका गहरा प्रभाव उस पर पड़ा है. यही कारण है किं शोभा आज तक अपनी सास से खुल नहीं पाई है.

ऐसे ही एक स्कूल में कल्पना जी को टीचर की नयी-नयी नौकरी मिली. पहले दिन जब वो बच्चों को पढ़ाने कक्षा में गई तो पहले दिन ही बच्चों को इतना डांट-डपट कर पढ़ाया कि बच्चे उनसे डर गए. नतीजा यह है कि बच्चों को अगर कोई सवाल ठीक से समझ में नहीं आता है तो भी वे उनसे यानि कल्पना जी से डर के मारे नहीं पूछते हैं. कक्षा से वे जैसे ही बच्चों को पढ़ाकर निकलती हैं, बच्चे राहत की सांस लेते हैं.

देखा जाए तो शोभा की सास या कल्पना जी की तरह कितने ही लोग ऐसे होते हैं, जो वास्तविकता में तो स्वभाव के बहुत ही अच्छे होते हैं, किंतु कभी-कभी पहली मुलाक़ात में किसी कारणवश, भूलवश या अनजाने में ही किसी के साथ या किसी के सामने कुछ ऐसी बात-व्यवहार कर बैठते हैं कि उस व्यक्ति की नज़र में उनकी वैसी ही छवि बन जाती है. दरअसल बहत से लोग ऐसे होते हैं, जो 'फर्स्ट इम्प्रेशन' यानि की  प्रथम प्रभाव के महत्व को ठीक से नहीं समझते हैं तथा लोगों की नज़रों में अपनी वो छवि बना बैठते हैं, जिसके अनुरूप उनका स्वभाव होता ही नहीं है.

फर्स्ट इम्प्रेशन के महत्व को नहीं समझने वाले लोग कभी-कभी अपना नुक़सान भी कर बैठते हैं, जैसा कि अभिलाषा कर बैठी. हुआ यूं कि अभिलाषा की शादी उसके माता-पिता आनंद नाम के जिस लड़के से करवा रहे थे, वो अमेरिका में कम्प्यूटर इंजीनियर था, इसलिए जब आनंद उसे देखने आया तो वो उसके सामने ज़रूरत से ज़्यादा ही आधुनिक कपड़े पहनकर गई. इसके लिए अभिलाषा के माता-पिता ने भी उसे नहीं रोका, क्योंकि वे भी यही सोच रहे थे कि आनंद बहुत मॉडर्न होगा. अभिलाषा की तो बात ही मत पूछिए. वो जितनी देर आनंद के सामने बैठी, उतनी देर अति आधुनिक बनने का नाटक करती रही. यहां तक कि आनंद जब-जब उससे हिंदी में बात करने की कोशिश करता, वो उससे अंग्रेज़ी में बात करने लगती. नतीजा यह हुआ कि आनंद ने अभिलाषा से शादी करने से इंकार कर दिया. यानि की अभिलाषा के स्वभाव का आनंद पर 'फर्स्ट इम्प्रेशन' (पहला प्रभाव) ही इतना बुरा पड़ा कि बनती हुई बात पल भर में बिगड़ गई. अतः बहुत ज़रूरी है कि पहली मुलाक़ात में हम किसी के साथ ऐसी बात या व्यवहार कभी न करें, जिसका उनके ऊपर बुरा प्रभाव पड़े.

कई विद्यार्थी जब नौकरी के लिए कहीं साक्षात्कार देने जाते हैं तो साक्षात्कारकर्ताओं के सामने इतनी ज़ोर से कुर्सी पर बैठते हैं कि साक्षात्कारकर्ताओं ऐसे विद्यार्थियों का बहुत ग़लत इम्प्रेशन पड़ता है. कुछ विद्यार्थी तो साक्षात्कार देने इस ढंग के कपड़े पहनकर जाते हैं, जिनमें वे पढ़े-लिखे विद्यार्थी कम और सड़कछाप हीरो ज्यादा नज़र आते हैं. विद्यार्थी के ऐसे रहन-सहन और पहनावे का भी साक्षात्कारकर्ताओं पर ग़लत प्रभाव पड़ता है, किंतु कई विद्यार्थी इन बातों से अनभिज्ञ होते हैं. दरअसल ये विद्यार्थी भी फर्स्ट इम्प्रेशन के महत्व को ठीक से नहीं समझने के कारण ऐसी ग़लती कर बैठते हैं, अतः हर व्यक्ति को जीवन में यही कोशिश करनी चाहिए कि वो पहली मुलाक़ात में किसी के भी साथ या किसी के भी सामने ऐसी कोई भी ग़लत हरक़त हरगिज़ न करे, जिसका ग़लत प्रभाव लोगों पर पड़े.

इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि आप सिर्फ़ पहली मुलाक़ात में ही किसी के साथ अच्छी बात-व्यवहार कीजिए, उसके बाद जिसके साथ जब जैसा जी चाहे, वैसा व्यवहार कीजिए. कहने का अर्थ सिर्फ़ यही है कि पहली मुलाक़ात में अगर आप किसी के साथ अच्छी बात-व्यवहार करते हैं तो उसका एक अलग ही प्रभाव लोगों पर पड़ता है. लोगों की नज़रों में आपकी एक अलग ही छवि बन जाती है, इसलिए पहली मुलाक़ात में सिर्फ़ दिखावे के लिए या किसी को आकृष्ट करने के लिए अच्छी बात-व्यवहार मत कीजिए बल्कि अपने व्यक्तित्व में निखार लाने के लिए भी हमेशा सबके साथ अच्छा व्यवहार करने की कोशिश कीजिए.

टिप्पणियाँ

  1. एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर उचित उदाहरणों के साथ लिखा गया एक बेहतरीन और सराहनीय आलेख। खास उदाहरणों से विषय को अच्छी तरह समझा जा सकता है कि आम जीवन मे भी पहली छवि का वास्तविक और सही होना कितना आवश्यक है 🙏🌸

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