सादा जीवन उच्च विचार, स्वस्थ तन -मन का है आधार
एक बात हर बच्चे को बचपन से पाठ्यपुस्तक के माध्यम से या घर के बड़े-बुजुर्गों के द्वारा अवश्य पढाई जाती है – “सादा जीवन उच्च विचार”. किन्तु पता नही क्यों बच्चे जैसे –जैसे उम्र के अलग –अलग पड़ावों से गुजरते हुए जीवन में आगे बढ़ते जाते है, वैसे –वैसे ये उतम विचार ना जाने कहाँ खोते चले जाते हैं और फिर ये विचार किसी भी व्यक्ति को जीवन के उस मोड़ पर याद आता है, जब उसके जीवन में आर्थिक समस्या उत्पन्न होने लगती है.
अब यहाँ पर सोचने वाली बात यह है कि अगर जीवन के शुरुआत से ही इस उतम कथन का पालन पूरा परिवार करे तो ख़ास उम्र में इसे अपनाने कि जरुरत ही नही पड़ेगी. क्योंकि जो लोग “सादा जीवन उच्च विचार” को अपने जीवन जीने का आधार बना लेते हैं, वो शुरू से ही अपने घर-परिवार, संस्था, नाते –रिश्तेदार, दोस्त –परिचित सभी को अपने विचार के अनुकूल पाने अथवा बनाने का प्रयास करते हैं. अगर कोई उनके विचार के अनुकूल नही होता है, तो ऐसे लोग चुपचाप उस व्यक्ति से किनारा कर लेते हैं या काम भर रिश्ता रखते हैं.
चूँकि आज के डिजीटल युग में कोई व्यक्ति “सादा जीवन उच्च विचार” को अपनाना नही चाहता है. स्टेट्स शो करना एक बीमारी की तरह फैल चुका है. अधिकांश लोग दोहरे चरित्र के बनते जा रहे हैं. सीधे –साधे लोगों के सामने सीधे –साधे बन जाते है और जहाँ दिखावा करना है, वहां जमकर अपने स्टेट्स का रंग जमाते हैं. ऐसे लोगों का दोहरा व्यक्तित्व बड़ी आसानी से पकड़ में आ जाता है.
“सादा जीवन उच्च विचार” ही हमारे बच्चों को उच्च विचार और संस्कार दे सकता है.दूसरों को प्रभावित करने के लिए किए गए कार्य से कभी भी कोई व्यक्ति चैन का जीवन नहीं जी सकता है. अपनी इच्छाओं को सीमित रखकर भी जिंदगी को सुंदर रूप दिया जा सकता है. यूँ ही प्राचीन काल से यह बात नही कहा जा रही है कि सादा जीवन उच्च विचार, स्वस्थ तन- मन का है आधार.
सादा जीवन जीने वाले व्यक्ति केवल अपने हित में नहीं सोचते हैं बल्कि वह अपने उत्थान के साथ –साथ अपने साथ वालों के उत्थान के लिए भी प्रयासरत रहते है. ऐसे विचार के लोगों के पास शायद ही कभी आर्थिक समस्या उत्पन्न होती है, क्योंकि इन्हें कम से कम पैसे में भी बेहतरीन रूप में जीने की कला आती है. ऐसे लोग मितव्ययी होते हैं और लोगों को अपने विचारों से प्रभावित ही नही करते हैं, बल्कि उन विचारों पर अमल भी करते हैं. इन्हें अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना आता है. चकाचौंध की दुनियाँ इन्हें प्रभावित नही करती है. ये अपने काम पर केन्द्रित रहते हैं और छोटी –छोटी बातों में बड़ी बड़ी ख़ुशी खोज लेते हैं. ये किसी सफलता की दौड़ में शामिल नही होते हैं, बस मन की शांति ही इनके जीवन की अनमोल पूँजी होती है.
अगर आप भी जीवन में संतुष्टि और शान्ति पाना चाहते हैं तो आज से “सादा जीवन उच्च विचार” के साथ जीवन को जीना शुरू कर दीजिये. किसी भी चीज को पाने की दौड़ में शामिल मत होइए. केवल अपने सत्कर्म पर केन्द्रित रहिये.
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