कहीं दूसरों के सामने आप भी अपने बच्चे के टेलेंट की नुमाइश तो नही कर रहे हैं ?
अकसर कई घरों में बचपन से लेकर आज तक मैं एक अजीब सी बात देखती आ रही हूं। हो सकता है मेरी तरह आपने भी देखा हो और इसे गलत भी समझा हो।
दरअसल ये बात है उन मासूम बच्चों की जिनके अंदर स्वाभाविक रूप से कोई खास बात होती है। मान लीजिए उसे अपनी आयु अथवा क्लास से ज्यादा कोर्स से बाहर की भी चीजें पढ़ने- लिखने आती हो, या फिर उसे गाना, डांस, कोई ख़ास गेम आम बच्चों से अधिक आता हो. ऐसे में अकसर माता -पिता के मन में आता है कि समाज के चार लोग उसके बच्चे की उस खूबी की तारीफ़ करें. अब ऐसे में घर पर कोई मेहमान, परिचित ,रिश्तेदार अथवा अड़ोसी -पडोसी आ गये तो बात -बात में अपने बच्चे की कुछ तारीफ करेंगे. बच्चे को झट से कुछ ख़ास सुनाने को या पढने को कहेंगे. डांस करने को या गाने को कहेंगे. इतफाक से अगर बच्चे ने माता -पिता के मन के अनुरूप सुना दिया या दिखा दिया तब तो कोई बात नहीं. किन्तु अगर उनके मन के अनुरूप प्रदर्शन नही कर पायें तो खुद को शर्मिंदा होते हुए पाकर सीधा -सा आरोप मासूम बच्चे पर लगा देते हैं. मेहमान के जाने के बाद बच्चे को कसकर डांटना -पीटना अथवा कोसना भी शुरू कर देते हैं. पहले मुझे ऐसा लगता था की सोशल मीडिया आने के बाद से हमारी सोसाइटी से यह सब लगभग खत्म हो चुका है. किन्तु मैं गलत थी. अभी भी मासूम बच्चों के टेलेंट का प्रदर्शन करने से कई माता -पिता बाज नही आ रहे हैं. ऐसे में इसके कुछ हानि -लाभ पर एक नजर डाल लिया जाये तो इसका कुछ फायदा बच्चे के साथ -साथ माता-पिता को भी होगा -
(1) जब आप अपने अबोध बच्चे को किसी बाहर वाले के आगे अचानक से कोई भी चीज करके दिखाने को बोलते हैं तो कई बार बच्चे नर्वस हो जाते हैं और सब कुछ भूल जाते हैं. ऐसे में बड़े होशमंद बच्चे तो चालाकी से खुद को शर्मिंदा होने से बचा लेते हैं किन्तु अबोध बच्चे चुप लगा जाते हैं. ऐसे में आपको बच्चे पर गुस्सा आता है कि उसने आपकी बेइज्जती करवा दी ,किन्तु आप उसके मन की स्थिति को नही पढ़ पाते हैं कि उसपर इसका क्या असर हुआ. ऐसी स्थिति में देखा गया है कि अधिकाँश बच्चे उस समय घर से बाहर -बाहर छुपकर रहना शुरू कर देते हैं, जब उनके यहाँ कोई बाहर वाला आया हुआ होता है. अगर उनमे कोई अच्छा टेलेंट पनप भी रहा होता है तो वो माता -पिता को बताने से कतराने लगते हैं. इसलिए माता -पिता होने के नाते आपका कर्तव्य बनता है कि आप बच्चे के मन को समझते हुए ही उसे किसी भी बाहर के व्यक्ति के सामने कोई ख़ास चीज करने को कहें. अगर बच्चा इसके लिए तैयार नही है तो उसे जिद्द ना करें. उसका मनोबल बढाने पर ध्यान केन्द्रित करें. ताकि वो स्वयं ही दूसरों के सामने कोई भी गुण को व्यक्त करने में सक्षम बने.
ऐसे में ना तो बच्चे का मनोबल आहत होगा और ना ही आपको बच्चे की वजह से किसी के सामने शर्मिंदा होना पड़ेगा.
(2)दूसरी एक बात और है जो उस वक्त माता -पिता को शायद समझ में नही आता है ,जब वो अपने ही दो -तीन बच्चों में से किसी एक के गुण का बखान बाहर वालों के सामने कर रहे होते हैं तो उस समय उनका ही दूसरा बच्चा आत्महीनता का शिकार होता रहता है. कोई और इन बातों का ध्यान रखे या ना रखे ,किन्तु माता -पिता को इस बात का ख्याल जरुर रखना चाहिए कि एक बच्चे की अत्यधिक तारीफ का नाकारात्मक असर दूसरे बच्चे पर ना पड़े. अन्यथा छोटी -सी दिखने वाली ये भूलें भविष्य में बड़ी महंगी साबित होती हैं.
(3) ये सही बात है कि कुछ बच्चों में ईश्वर प्रदत कुछ ख़ास गुण अथवा टेलेंट होते हैं,जिन्हें माता -पिता दुनियां के सामने लाना चाहते हैं और इसमें कोई बुराई भी नही है. किन्तु ये बातें तब गलत साबित होती हैं, जब बच्चा माता -पिता की अपेक्षानुसार अपने टेलेंट का प्रदर्शन नही कर पाता है. ऐसे में किसी भी माता -पिता को बस इतना याद रखना है कि बच्चा कभी -कभार स्वभाविकता में भी अपने टेलेंट अथवा गुण का गलत प्रदर्शन कर सकता है. इसके लिए आपको किसी के आगे शर्मिंदा महसूस करने की कोई आवश्यकता नही है. अपने बच्चे के टेलेंट का स्वाभाविक विकास होने दीजिये. बच्चे का मनोबल सुदृढ़ कीजिये. आप स्वयं पायेंगे कि बढ़ती हुई उम्र के साथ आपका बच्चा स्वयं लोगों के सामने स्वयं को प्रस्तुत करने में सक्षम हो रहा है.

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