वर्दी और सम्मान
आज इस लेख को लिखने के पीछे मेरे साथ हाल ही में घटी एक घटना है. एक छोटे -से सामाजिक समारोह में मुझे सुनने को मिला कि चाहे कितनी भी समाज सेवा या देश सेवा कर लो, लेकिन सरकारी वर्दी में देश सेवा करने का जो आनन्द है, वो साधारण कपड़ों में नही है. कंधे पर लगा हुआ स्टार जब लोग देखते हैं और तारीफ़ करते हैं तो मत पूछ क्या मजा आता है. इसलिए यार मुझे तो हर हाल में प्रशासनिक सेवा में जाना है. आस -पास खड़े लोग उसकी बातों का समर्थन कर रहे थें और मैं एक कोने में खड़ी होकर यह सोचने लगी कि क्या इनकी सोच सही है? और अगर इनकी सोच सही है तो फिर जो लोग इस देश में साधारण कपड़ों में दिन -रात देश -समाज की सेवा में जुटे हुए हैं, क्या उनके कार्यों का कोई मोल नही?
आज की तारीख में अगर आप खुद से सर्वे करने में लग जायेंगे तो आपको बड़ी हैरानी होगी कि हमारे देश में हजारों -लाखों की संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके पास खुद के जीने के लिए भी पर्याप्त पैसा नही है, मगर समाज हित के कार्यों में जी- जान से जुटे हुए हैं. कोई एक -दो हो तो मैं उनके नाम यहाँ पर लिख दूँ. मेरी नजर में तो ऐसे देश भक्त और समाजसेवी मेरी आँखों के सामने दिन- रात रहते हैं और उन्हें इस बात की कोई फ़िक्र नही कि कौन उनके सत्कर्म को देख रहा है और कौन नही देख रहा है. ये देश -समाज की सेवा के लिए किसी प्रशासनिक वर्दी और उनपर लगे स्टार के मोह्ताज नही है. उन्हें तो बस अपना देश -समाज अच्छा बने, इसकी फ़िक्र है.
सच्चाई तो यह है कि आज ऐसे ही समाज सेवियों और देश भक्त की जरूरत है, जो निःस्वार्थ भाव से अपना सत्कर्म करें और देश -समाज को सुंदर बनाएं. इसलिए आपमें से जो भी लोग सिर्फ उन्हें ही देश भक्त समझते है, जिनके पास प्रशासनिक अधिकार है या जो फौजी हैं सैनिक हैं तो आज ही इस सोच को बदलिए और उनको भी दिल से सम्मान दीजिये जो बिना वर्दी के होकर भी देश -समाज को सही राह पर ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं.
मैं इस लेख के साथ एक लिंक भी शेयर कर रही हूँ , जिसमे अतिसाधारण लोग एक जुट होकर समाज को मुश्किल में अपनी सेवा कार्य दे रहे हैं👇
https://kartavyasadhana.in/view-article/four-colours-of-social-work-writes-amit-kohli

बहुत ही अच्छा आलेख। समाज सेवा वर्दी में हो या साधारण कपड़ों में, उसकी कीमत समान है।
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