रोक लो, रूठ कर उनको जाने न दो

अक्सर यह देखने में आता है कि छोटी-सी बात पर भाई की भाई से या पति की पत्नी से बहस हो गयी और बढ़ते–बढ़ते बात इतनी बढ़ गयी कि बरसों के रिश्ते पलभर में टूट गए. अभी हाल ही की बात है. महेशजी की अपने बड़े भई से कुछ रुपयों के लेन-देन को लेकर बहस हो गई और बात इतनी बढ़ गई कि दोनों भाइयों ने रिश्ता ही तोड़ लिया. हुआ यूँ कि महेशजी की अपनी अलमारी में दो हज़ार रूपये रखे हुए थे. एक दिन महेशजी घर में नहीं थे और उनके बड़े भाई रमाकांत जी को रुपयों की जरुरत आन पड़ी, तो उन्होंने अलमारी में से छोटे भई से बगैर पूछे रूपये ले लिए. रमाकांतजी ने छोटे भाई से बगैर पूछे रूपये क्या ले लिए, छोटे भाई ने तो उन्हें चोर कह दिया और दोनों भाइयों के बीच ऐसी लड़ाई हुई कि खून के रिश्ते पलभर में टूट गए.

जैसे इन दिनों भाइयों के रिश्ते पलभर में छोटी-सी बात पर टूट गए, उसी प्रकार कई और रिश्ते भी हैं, जो कभी-कभी छोटी सी बात पर टूट जाते हैं. लेकिन सच तो यह है कि छोटी- छोटी कड़वी बातों से अगर रिश्ते टूट जाते हैं तो कभी–कभी छोटी-सी मीठी व प्यारी बातों से रिश्ते टूटते-टूटते बच भी जाते हैं या यूं कह लीजिए कि टूटे हुए रिश्ते फिर से जुड़ भी जाते हैं.

माला का अपनी देवरानी किरण से एक दिन बहुत ही छोटी- सी बात पर भयंकर झगड़ा हो गया. बात इतनी बढ़ गई कि उसने पति से साफ़-साफ़ कह दिया कि या तो वो इस घर में रहेगी या फिर किरण रहेगी. देवरानी थोड़ी समझदार थी इसलिए वो अपने पति के साथ एक किराए के माकन में रहने चली गई. देवरानी के जाने के बाद माला को उसकी कुछ प्यार बातें याद आने लगीं. देवरानी का अच्छा व्यव्हार माला को अपने किए पर पछताने  को मजबूर करने लगा. जैसे कि उसकी देवरानी ने कहा था कि वो उसे सगी बहन की तरह प्यार व इज्ज़त देती है. इसी प्रकार एक दिन जब माला को बुखार हो गया तो उसकी देवरानी रात भर उसके सिरहाने बैठी रही और उसके बेटे की देखभाल उससे भी ज़्यादा अच्छे तरीके से की. इसी प्रकार एक दिन माला के हाथों से सास की साड़ी इस्त्री करते वक़्त जल गई तो देवरानी ने सास की डांट से जेठानी को बचाने के लिए सास से झूठ कह दिया था कि साड़ी उससे जल गई है और जेठानी के बदले स्वयं सास की डांट सुन ली थी.

देवरानी की कुछ ऐसी ही छोटी-छोटी मीठी व प्यारी बातों को याद करने पर माला को लगा कि उसे देवरानी से छोटी- सी बात पर इस तरह झगड़ कर रिश्ता नहीं तोड़ना चाहिए था. गलती तो हर इन्सान से होती है. उससे गलती तो गयी तो क्या हुआ? आखिर मैं बड़ी हूँ, मुझे उसे क्षमा कर देना चाहिए था. फिर तो देवरानी के लिए माला के मन में ऐसा अपनापन उमड़ा कि उसने झट से एक प्यार भरा पत्र लिखकर देवरानी को भेज दिया और उसे हक़ जताते हुए साफ-साफ लिख दिया की पत्र मिलते ही वह तुरंत वापस घर आ जाए. देवरानी को भी जेठानी का खट्टा-मीठा पत्र बड़ा अच्छा लगा और वह तुरंत जेठानी के पास चली आई, जिसका नतीज़ा यह है कि आज वे दोनों एक ही घर में एक ही छत के नीचे बड़े प्यार से रह रही हैं.

गुण- अवगुण तो सभी में होते हैं. यदि कोई दोस्त या रिश्तेदार आपके साथ कोई अनुचित व्यव्हार करता है तो आप तुरंत उससे नाता तोड़ लेने की बात सोचने लगते हैं, साथ ही उसकी ओर आप देखना भी पसंद नहीं करते हैं, लेकिन ऐसा करना ठीक नहीं है. अगर हर किसी की छोटी- छोटी बात का बुरा मानकर रिश्ता तोड़ने लगेंगे तो धीरे-धीरे सारे रिश्ते ही टूट जाएंगे और हम संसार में अकेले रह जाएंगे.

इसलिए अपनों की छोटी-छोटी बातों पर रिश्ता तोड़ने से अच्छा है कि हम अतीत में अपने साथ उसके द्वारा किये गये अच्छे व्यव्हार, प्यार और उपकार को भी न भूलें. इसे हमेशा अपने दिल में संजो कर रखें.

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