हर बात की अपेक्षा दूसरों से ही क्यों?
आपने अपने घर- परिवार में या आस - पड़ोस के लोगों को देखा होगा, जो दूसरों पर हुक्म चलाते हैं, दूसरों के लिए तरह- तरह के नियम- कानून बनाते हैं या दूसरों से अपेक्षा करते हैं कि वह उनकी हर बात माने, पर स्वयं वे दूसरों के हुक्म पर नहीं चलना चाहते हैं. किसी के आदेश को यूं ठुकरा देते हैं जैसे वह सड़क पर पड़ी हुई कोई चीज हो. दूसरों के लिए घर- परिवार में हजार प्रकार के नियम- कानून बनाएंगे, मगर स्वयं उस नियम - कानून को तोड़ने में सबसे आगे रहेंगे. अब अनीता को ही देख लीजिए. तीन बहनों में वो सबसे बड़ी बहन है. अपनी दोनों छोटी बहनों पर हुक्मबाजी करती रहती है. यहाँ मत जाओ. वहाँ मत जाओ. छत पर क्यों खड़ी थी? इतनी शाम को किस सहेली के घर जा रही हो? यानि की छोटी बहनों पर हर तरफ से पाबन्दी, मगर स्वयं हर काम करती है. माँ - बाप के बार - बार रोकने पर भी ढलती शाम को सहेलियों के घर चली जाती है. सहेली का भाई रात को घर तक छोड़ जाता है. कॉलेज से सहेलियों के साथ शॉपिंग करने मौलचली जाती है. दोनों छोटी बहनें बड़ी बहन की मनमानी देखती रहती हैं, मगर उनके पास चुप रहने के सिवा दूसरा कोई उपाय नहीं है. सुनंदा जी की सास घर में सफाई - संबंधी कुछ नियम कानून बनायी हुई हैं. जैसे ड्रॉइंग रूम मे कोई व्यक्ति मांस मछली नहीं खाएगा. भीगें पाँव से घर में कोई नहीं चलेगा. परदे में कोई हाथ नहीं पोछेगा वगैरह – वगैरह. मगर वे स्वयं ही लुके - छिपे इन नियमों को तोड़ती रहती हैं. अगर आस - पास किसी को कमरे में नहीं देखती हैं तो झट से खिड़की के परदें में हाथ पोंछ लेती हैं. चुपचाप भीगें पाँव से पूरे घर में चलती रहती हैं. लेकिन घर में किसी को हिम्मत नहीं है जो उन्हें इसके लिए कुछ कहे. यानि की दूसरों को अपने द्वारा बनाए गए नियम कानून पर चलने को मजबूर करेंगी, मगर स्वयं नियम कानून तोड़े तो कोई बात नहीं. आप अकसर देखिएगा की कई सास चाहेंगी उनकी बहु घर का सारा काम करे. घर में एक - एक का ख्याल रखे. सबकी फरमाइश तुरन्त पूरा करे. मगर यही सब अगर उनकी बेटी को अपने ससुराल में करना पड़े तो वे कहेंगी कि हाय! मेरी फूल- सी बेटी को नौकरानी बना दिया है उनलोगों ने. वे बेटी को ससुराल वालों के खिलाफ उल्टी पट्टी पढ़ाना शुरू कर देती हैं. यानि की यहाँ पर भी वही बात लागू होती है, हर बात की अपेक्षा दूसरों से ही करना. लेकिन ऐसा करना क्या ठीक है? बिल्कुल भी नहीं. ऐसा करने से घर में आशांति ही फैलती है. परिवार में एक दूसरों के प्रति प्रेम की जगह क्रोध के भाव पैदा होने लगते हैं. अत: घर परिवार में शान्ति बनी रहे, इसके लिए बहुत जरूरी है कि जिस बात की या काम की अपेक्षा हम दूसरों से करते है, स्वयं भी उसपर अमल करने की कोशिश करें. घर में अगर कोई नियम कानून बनाते हैं तो सबसे पहले स्वयं उसपर अमल करना चाहिए, ताकि कोई उस नियम कानून को तोडें तो आप उसे अधिकार से टोक सकें.
-------------------------------------------------------------------------
तस्वीर -सप्तरंग स्टूडियो से (आर्टिस्ट- रश्मि पाठक)
Absolutely
जवाब देंहटाएं