पढ़ें 8 अनिवार्य बातें, उपहार लेने- देने से पहले
जमाना जरुर बदल गया है किन्तु आज भी त्योहारों, विवाहोत्सव या जन्मोत्सव के दिन आते ही हम अपने मित्रों और रिश्तेदारों के लिए उनकी पसंद का उपहार खरीदने में लग जाते हैं. हालाँकि यह परंपरा प्राचीन युग से चली आ रही है. जिस युग में भी यह परम्परा शुरू की गयी हो, इससे कोई फर्क नही पड़ता है, क्योंकि एक बात तो इस सत्य को जरुर दर्शाती है कि यह परम्परा बेहद कोमल भावना के साथ शुरू की गयी होगी. क्योंकि उपहार न केवल देने वाले की भावनाओं का प्रदर्शन करती है, बल्कि उपहार लेने वाले के उत्साह व् आनन्द को भी प्रदर्शित करती है. अत: आप जब भी किसी के लिए उपहार खरीदें तो इन 8 मुख्य बातों का ध्यान अवश्य रखा कीजिए-
उपहार में छुपी है आपके इज्जत और प्रेम की अभिव्यक्ति-
(1) सर्वप्रथम तो उपहार देते समय आयु वर्ग का ख्याल रखना जरुरी है. अगर आप इसका ख्याल नही रखेंगे तो हो सकता है कि आपने जो चीज जिसके लिए दी, वो उसके आयु के हिसाब से सही नही है, तो उसे वह स्वयं इस्तेमाल नही करके किसी और को इस्तेमाल करने के लिए दे देगा. अगर कभी उसपर आपकी नजर पड़ गयी तो आपको भी मन से अच्छा नही लगेगा.
(2) ख़ुशी के किसी भी अवसर (विवाहोत्सव, जन्मोत्सव, कोई विशेष डे आदि) पर हमें हमेशा अपनी हैसियत के मुताबिक ही उपहार देने चाहिए. उस वक्त बहुत जरुरी है कि हम अपने मन में संबंधियों या मित्रों से प्रतिदान की लालसा न रखें. यदि उपहार खरीदते समय हम उपहार पाने वाले की हैसियत को नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखें तो हमें बाद में कोई मानसिक अवसाद नही झेलना पड़ेगा.
(3) कुछ पैसा बचाने के फेर में कई लोग सस्ते उपहार के चक्कर में पड़ जाते हैं और मामूली कम्पनियों की चीज खरीद लेते हैं. दो– चार दिन में ही वो चीज टूट गई या किसी प्रकार की कोई खोट निकल आई तो उपहार पाने वाला व्यक्ति आपका सगा ही क्यों न हो, वो मन ही मन आपको कोसने लगता है. मौका मिले तो चार लोगों के बीच में इसे सार्वजनिक भी कर देता है. इसलिए अगर आपकी हैसियत ठीक-ठाक है तो अच्छी कंपनियों की टिकाऊ वस्तुएं ही उपहार में दें. ताकि उपहार पाने वाला व्यक्ति उसका उपयोग अधिक दिनों तक कर सकें.
(4) अगर आपको उपहार खरीदने के लिए समय न मिल रहा हो या फिर समझ में नही आ रहा हो कि क्या उपहार दूँ तो नकद उपहार देना सर्वोत्तम तरीका है. इस पैसे से बाद में उपहार पाने वाला व्यक्ति अपनी पसंद का कुछ भी खरीद सकता है. किन्तु नकद उपहार लिफ़ाफ़े में डालकर ही दीजिएगा.
(5) कई बार यह भी देखा कि नकद उपहार देने वालों की रकम को लोग लिफाफा खोलकर देख लेते हैं और किसी नोट बुक या डायरी में नाम के साथ उपहार की रकम को लिखते जाते हैं. जो कि मेरे ख्याल से गलत है. अगर कोई व्यक्ति आर्थिक स्थिति सही नही होने के कारण कम रकम दिया है तो वह झेंप जाता है. अत: नकद उपहार की सूचि बनाने के लिए आप घर के बाकि सदस्यों के साथ गुप्त सूचि बनाने के उपायों पर विचार कर सकते हैं.
(6) कई बार आर्थिक रूप से कमजोर मित्र या रिश्तेदार द्वारा दिए गए उपहार की लोग मजाक उड़ाते हैं, जो कि विकृत मानसिकता का घोतक है. अगर हम स्वयं को स्वस्थ मानसिकता वाले व्यक्ति की श्रेणी में समझते हैं तो हमे मित्र अथवा रिश्तेदार के आर्थिक पक्ष को तहे दिल से समझना चाहिए और उनके द्वारा दिए गये उपहार का सम्मान करना चाहिए.
(7) अब इस उपहार के लेन-देन में अकसर एक बात और देखी जाती है कि अधिक संख्या में एक ही तरह की वस्तुएं या उनकी हैसियत के मुताबिक निम्न स्तरीय वस्तुएं आ गयी हैं तो उसे लोग अलमारी में सुरक्षित रख देते हैं, ताकि भविष्य में उचित अवसर देखकर अन्य लोगों को उपहार स्वरुप दे दें. ऐसा करना बिलकुल गलत है.कई बार ऐसे लोगों का भेद किसी कारणवश खुल गया तो इज्जत मिट्टी में मिल जाती है. यथा संभव इस प्रकार के कार्य से बचना चाहिए.
(8) अंत में एक अच्छा-सा सुझाव अवश्य देना चाहूँगी. यदि आपके हाथों में कोई हुनर है तो अपने हुनर के हिसाब से कोई उपहार अपने हाथों से बनाया हुआ अपने प्रिय मित्र अथवा रिश्तेदार को दीजिए तो और भी अच्छी बात होगी.
ये मत भूलिए की उपहार भी हमारे व्यक्तित्व की गरिमा और सौहार्द्रयपूर्ण व्यवहार का परिचायक है. इसलिए उपहार के लेन- देन में पूर्ण सतर्कता बरतें.
तस्वीर - सप्तरंग स्टूडियो से (आर्टिस्ट - रश्मि पाठक )

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