सोशल मीडिया और आप- 10 टिप्स

 

आज के डिजीटल वर्ल्ड में शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जो किसी न किसी रूप में सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ न हो. चूँकि जमाना बदल रहा है और लगभग देश के हर कोने में सोशल नेटवर्क पहुँच चुका है, ये हम सभी जानते हैं. आज सेकंड भर में लोग देश- विदेश में रहने वाले लोगों से जुड़ जाते हैं. चाहे वो माध्यम फोन हो, व्हाट्सएप्प हो, फेसबुक हो या अन्य कोई भी सोशल नेटवर्क हो. इस बात से हरगिज इंकार नही किया जा सकता है कि सोशल मीडिया ने हमे नौकरी, बिजनेस, पढ़ाई आदि के क्षेत्रों में काफी सहयोग किया है. हमारे पास अगर समय की कमी है और कोई ख़ास न्यूज़ देखना है तो तुरंत अपने मोबाइल पर न्यूज़  चैनल खोलकर देख लेते हैं. आजकल लगभग सभी न्यूज़ चैनल वाले अपना फेसबुक एकाउंट अथवा पेज बनायें हुए हैं. कोई भी नया न्यूज़ आने पर सबसे पहले उसमे अपडेट करते है. जिसके कारण हम पल पल की खबरों से अवगत होते रहते हैं.

सोशल मीडिया के कुछ ख़ास प्लेटफार्म ने हमे अपनों के करीब ला दिया है. जिनसे हमारा सालोंसाल मिल पाना कठिन है, उनसे हम जब चाहे तब मिल लेते हैं. हमारे कई भूले- बिछुड़े मित्र व नाते-रिश्तेदारों को भी इसने हमसे मिला क्या दिया है, बल्कि मिलवाता ही जा रहा है.

विद्यार्थियों को जहाँ पढ़ाई-लिखाई में सहयोग मिल रहा है, वही विभिन्न प्रकार के कार्यों तथा व्यवसायों से जुड़े लोगों को भी सोशल मीडिया से लाभ हो रहा है. यानि की सौ बात की एक बात यह हुई कि सोशल मीडिया हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है.

लेकिन क्या हम सोशल मीडिया का सही उपयोग कर रहे हैं? या सिर्फ ये कहने में सबके साथ लगे हुए हैं कि जब से यह सोशल मीडिया आया है, तब से बच्चे बर्बाद हो रहे हैं. समय और पैसे की बर्बादी के साथ-साथ चरित्र भी लोगों का गिरता जा रहा है. पास के रिश्ते-नाते छुटते जा रहे हैं और फेसबुकिए मित्रों की भीड़ में लोग कभी अपने गम को भुलाने की तो कभी ख़ुशी को दिखाने में लगे हुए हैं. सही कह रही हूँ अगर आप भी इस प्रकार की सोच से ग्रस्त हो रहे हैं या हो रही हैं, तो मेरी यह रचना एक बार जरुर पढ़िएगा.

दरअसल मै उपर जो भी बात लिखी हूँ, वो गलत नही है, किन्तु एक बार आप अपने- आप से पूछ कर देखिए कि आज हमारे समाज में जिस प्रकार से शिक्षा, संस्कार, अनुशासन, आचार-विचार, व्यवहार आदि में जो गिरावट आ रही है, उसका सबसे बड़ा कारण है सोशल मीडिया का दुरूपयोग नही है तो फिर क्या है? यहाँ पर अगर गौर से देखा जाये तो इसका सबसे ज्यादा दुरूपयोग प्राय: हर घर में माता-पिता ही कर रहे हैं. इस बात की पुष्टि के लिए मैं एक छोटा–सा किस्सा आपको सुनाना चाहती हूँ. दो-चार दिन पहले मेरी एक परिचिता सुधा जी ने अपनी 14 वर्षीय बेटी के सामने किसी बात पर मुझसे कहा कि आजकल पारुल सिर्फ मोबाइल चलाती रहती है. जब देखो किसी न किसी दोस्त से इसका चैट चलता रहता है. सुधा जी आगे कुछ और बोलती, इससे पहले ही पारुल ने बीच में ही अपनी मम्मी की बात को काटते हुए मुझसे कहा- आंटी मम्मी कितने आराम से मेरी शिकायत कर रही हैं. मैं बताऊं आपको मम्मी रात को एक बजे तक इस सोशल मीडिया पर वेब-सीरिज देखती रहती है. वो भी आंटी क्राइम वाले वेब-सीरिज सब देखती है और पापा की तो पूछिए ही मत. वो तो अपने सारे बेस्ट फ्रेंड्स से देर रात को ही चैट करते हैं. लेकिन मुझे टोकते रहते हैं. पारुल का इस तरह से अपने माता–पिता के बारे में बोलना मुझे बिलकुल भी अच्छा नही लगा. लेकिन पारुल का इस तरह से मुंहफट होना भी उसके माता-पिता द्वारा की गई परवरिश का ही नतीजा है.

यहाँ पर मैं मुख्य रूप से यह कहना चाहती हूँ कि अगर हम बड़े लोग सोशल मीडिया का उपयोग सही तरीके से करें तो काफी हद तक हमारे बच्चे भी इसका उपयोग सही से ही करेंगे. लेकिन इसके लिए जरुरी है कि हम बड़े पहले खुद को सोशल मीडिया के आकर्षण से दूर रखें. तो आइये जाने कुछ ख़ास बातें जिसका पालन करके हम अपने घर-परिवार को सोशल मीडिया के दुष्परिणाम से दूर रख सकते हैं.

(1) अगर आप या आपके परिवार में आपके बच्चे सोशल मीडिया का उपयोग अपने बिजनेस, नौकरी, पढ़ाई या सामाजिक कार्यों के लिए कर भी रहें हैं तो उसका भी एक रूटीन होना चाहिए. ये नही होना चाहिए कि दिनभर आप सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म से चिपके हुए रहें. क्योंकि मैं खुद इसका उपयोग प्रतिदिन रूटीन के अनुसार करती हूँ. और खुद गौर की हूँ कि और भी लोग हैं जो सोशल मीडिया पर रूटीन के हिसाब से चलते हैं. रूटीन से चलने का अर्थ है कि वो खास समय पर ही इंटरनेट ऑन करते हैं और काम खत्म करके इंटरनेट ऑफ़ कर देते हैं.

(2) आजकल कई सोशल प्लेटफार्म पर एक बात देखी जा रही है कि लोग आपके मैसेंजर पर आकर आग्रह करते हैं कि आप उनके चैनल को सब्सक्राइब कर दें, उनके video को लाइक, कमेन्ट और शेयर कर दें. आपको इस प्रकार के मैसेज से बचने का पूर्ण प्रयास करना चाहिए. क्योंकि अगर आपकी कोई चीज अच्छी होगी तो लोग उसे अवश्य पसंद करेंगे. इसके लिए किसी को जबरदस्ती आग्रह वाले मैसेज भेजकर आप अपनी गरिमा धूमिल कर लेते हैं.

(3) आजकल के युवाओं के साथ-साथ अधेड़ आयु के लोगों में ये बात देखी जा रही है कि किसी पोस्ट पर लाइक, कमेन्ट आदि प्राप्त करने के लिए वो बैचेन रहते हैं. पोस्ट डालने के बाद बार-बार मोबाइल ऑन करके आने वाले लाइक, कमेन्ट को गिनते रहते हैं. अगर उम्मीद के अनुसार लाइक, कमेन्ट नही आया तो कई बार तनाव में भी आ जाते हैं और फिर दिमाग लगाने लगते हैं कि ऐसा क्या किया जाये कि जमकर लाइक्स आये. अब आप ही समझिए कि इसके पीछे इतना दिमाग खर्च करने से अच्छा ये नही होगा कि आप नए पोस्ट्स पर काम करें या कोई दूसरे काम में अपना ध्यान लगायें.

(4) मन मुताबिक लाइक्स और कमेंट्स या सबस्क्राइबर बनाने के लिए कई बार समझदार लोग भी सोशल मीडिया पर (खासकर फेसबुक पर) मित्रों की लम्बी कतार लगा लेते हैं. उन्हें लगता है कि जितने ज्यादा मित्र होंगे, उतने ज्यादा लाइक्स और कमेंट्स मिलेंगे. बस इसी उधेड़बुन में उनका कीमती समय बर्बाद होता जाता है. जरुरी है कि आप सोशल मीडिया पर इस तरह के लालच से बचें. क्योंकि यह लालच कई लोगों को मानसिक रोगी भी बना देता है.

(5) कई बार आप किसी वेबसाईट पर या चैनल्स पर कोई ख़ास टॉपिक सर्च करने जाते हैं और वहाँ जाने पर कई video या post अपने आप खुलते चले जाते हैं और आप उसे देखने के पीछे ये भूल ही जाते हैं कि हम क्या सर्च करने इस वेबसाईट पर आयें थे? इसलिए जब आप सोशल मीडिया पर काम कर रहे हो तो केन्द्रित होकर काम करें. मन को यहाँ-वहाँ न भटकायें. समय मूल्यवान है, इसे कभी न भूलें.

(6) कोशिश करें की सोशल मीडिया पर आपके कार्यों के लिए लोग आपको पहचाने. आप युवा हो या उम्रदार हों, किन्तु अपनी गरिमा को बनायें रखते हुए ही कोई कार्य करें.

(7) नित्य दिन सोशल मीडिया पर नये -नये चैलेंज अथवा प्रतियोगिताएँ या फिर कार्यक्रम आदि आयोजित होते रहते हैं, जिनका कई बार कोई मतलब नही होता है. अत: इन चीजों में शामिल होने से पहले अच्छी तरह से अवश्य सोच लें. कई बार ये सब चीजें समय की बर्बादी ही होती हैं.

(8)कई बार कई लोग अपने बेफिजूल के पोस्ट आपके प्रोफाइल पर टैग कर देते हैं और आपको खीज होती है. अच्छा होगा कि आप टैग के ऑप्शन लॉक रखें. ताकि जो पोस्ट आपको अच्छा न लगे उसे आपको बंद रखने की स्वतंत्रता रहे.

(9) कोशिश करें कि अपने निजी जीवन के उस हिस्से का खुलासा कभी भी किसी पोस्ट अथवा अन्य माध्यम से न करें, जिसकी वजह से लोग सोशल मीडिया पर आपके हमदर्द दिखाई दें और पीछे में आपकी बातों को मजा ले लेकर एक-दूसरे को बताकर आपका मजाक उड़ायें.

(10) अंत में बस इतना ही कहना चाहूँगी कि सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना या इसका इस्तेमाल करना बिलकुल भी गलत नहीं है, लेकिन अगर यह आपके घर-परिवार की जिम्मेदारी, बच्चों के व्यवहार, विचार और संस्कारों पर हावी होने लग जाए तो यह बहुत खतरनाक रूप ले लेता है. अत: सोशल मीडिया को सही रूप में समझे और इसका उपयोग सही से करें.

तस्वीर – सप्तरंग स्टूडियो से (चित्रकार- रश्मि पाठक)

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