बच्चों के सहारे दूसरों के घर-परिवार में झांकना उचित नहीं

कुछ लोगों की आदत होती है बच्चों के सहारे दूसरों के घरों में झांकने की। इस आदत की शिकार ज्यादातर महिलाआएं ही होती हैं। उन्हें ही दूसरों की निजी जिंदगी में क्या हो रहा है, यह जानने की ज्यादा इच्छा रहती है। बच्चे भोले व नासमझ होते हैं। इसलिए उनकी नासमझी का फायदा उठाकर चतुर महिलाएं उन्हें प्यार से बहला फुसलाकर उनके घर की निजी बातें पूछ लेती हैं और फिर महिला - मंडली में बैठकर रस ले लेकर दूसरों के घर- परिवार की टीका - टिप्पणी करती हैं। अब तो इस काम में सोशल मीडिया भी अपनी भूमिका जमकर निभा रहा है. सच पूछिए तो इस मामले में मेरी पड़ोसन मधुरी जी का जबाब नहीं। न जाने क्यों उन्हें दूसरों के घर की बातें जानने में इतनी दिलचस्पी रहती है। वो तो अपने घर की काम करनेवाली बाई से भी दूसरों के घर की निजी बातें पुछने से बाज नहीं आती हैं। मासूम बच्चों को प्यार करते - करते वो कितनी ही बातें उससे उसके घर की पूछ लेती हैं। अपनी इसी गंदी आदत के कारण उन्हें एक दिन स्नेहा जी के सामने शर्मिंदा होना पड़ा था। दरअसल माधुरी जी और स्नेहा जी में एक ही फ्लैट में रहने के कारण तथा आपस में विचार मिलने के कारण काफी दोस्ती थी। स्नेहा जी एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करती थी। कभी-कभार उन्हें दफ्तर से आने में देर हो जाती थी, तो उनका चार वर्षीय बेटा मोहित माधुरी जी के घर चला जाता था, तथा थोड़ी देर उनके बच्चों के साथ खेलता- कूदता था। माधुरी जी स्नेहा जी के बेटे मोहित के भोलापन का खूब फायदा उठाती थी। वो मोहित से बातों ही बातों में प्यार से उसके घर की निजी बातें पूछती थी कि आज मम्मी ने घर में क्या पकाया यानि कि क्या खाना बनाया है। आज तुम्हारे घर से तुम्हारे पापा के चिल्लाने की आवाज क्यों आ रही थी? बेचारा नासमझ मोहित उन्हें अपने घर की सारी बातें एक सांस में बताता चला जाता कि आज मम्मी-पापा में खूब लड़ाई हुई है या मम्मी बिना खाए ही दफ्तर चली गयी। इस तरह की कितनी ही निजी बातें मोहित नासमझी में माधुरी जी को बताता चला जाता था। किन्तु माधुरी जी की चतुराई ज्यादा दिनों तक नहीं चल पायी। एक दिन मोहित ने सारी पोल खोल दी।

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हुआ यूँ कि एक दिन माधुरी जी की दस वर्षीय बेटी ‘अंशु' स्नेहा जी के यहाँ वीडियो पर फिल्म देखने के लिए आयी, तो स्नेहा जी उससे पूछी की घर में मम्मी क्या कर रही अंशु बोली की मुझे नहीं मालूम, तो स्नेहा जी बोली कि तुम अभी - अभी घर से आ रही हो और तुम्हें मालूम नहीं है कि तुम्हारी मम्मी घर में क्या कर रही है। स्नेहा जी अंशु को आगे कुछ बोलती, इससे पहले ही रोहित बोल पड़ा वाह! अंशु दीदी आपकी मम्मी रोज मुझसे मेरे घर की बातें पूछती हैं तो मैं उन्हें सारी बात बता देता हूँ, मगर मेरी मम्मी आज आपसे सिर्फ एक बात पूछी तो आप इंकार कर रही हैं। मोहित के मुंह से ऐसी बातें सुनकर स्नेह जी का माथा ठनका। वो मोहित को डांट-डपट कर पूछी की अंशु की मम्मी रोज तुझसे क्या पूछती है तो मोहित ने सब कुछ सच - सच बता दिया। फिर क्या होना था। स्नेहा जी सीधे मधुरी जी के पास गयीं और उन्हे काफी बुरा - भला कहीं। मधुरी जी को उस दिन स्नेहा जी के सामने काफी शर्मिंदा होना पड़ा। उस दिन के बाद से उनकी दोस्ती ही टूट गयी।

देखा जाए तो हर घर में छोटी - मोटी बातें होती ही रहती हैं। कौन सा ऐसा घर है जहाँ पति - पत्नी या भाई - भाई या बहन - बहन में झगड़ा नहीं होता है। हर घर में लोग अच्छा खराब दोनों तरह का खाना खाते हैं। पर किसी मासूम व नासमझ बच्चे से उसके घर की निजी बातें पूछना क्या जायज है? हम अपने बच्चों को तो खूब अच्छी तरह से सीखा पढाकर किसी के घर भेजते हैं कि अपने घर की कोई बात वहाँ मत कहना लेकिन दूसरों के बच्चों से हम कितनी चालाकी के साथ उसके घर की व्यक्तिगत बातें पूछ लेते हैं। बच्चों के सहारे दूसरों के घर में झांकना एक बहुत ही बुरी आदत है। इसीलिए दूसरों के बच्चों से कभी भी उनके घर की निजी बातों को पूछने की कोशिश मत कीजिए। शालीनता के अंतर्गत जो बाते आती है, वही बातें दूसरों के बच्चों से पूछिए। तभी आपके संबंध आपके पड़ोसियों एवं परिचितों से मधुर बने रहेंगें.

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तस्वीर- सप्तरंग स्टूडियो से (आर्टिस्ट: रश्मि पाठक) 

टिप्पणियाँ

  1. वास्तव में कोई भी घर विचारों की भिन्नता से बचा नही है किंतु ये तथ्य किसी के लिये आनन्द का विषय कैसे हो जाती है ये विचारणीय है साथ ही ये दुखद भी की इसमे छोटे बच्चों को शामिल किया जाता है।
    बेहतरीन चिन्तनबोध !!

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    1. धन्यवाद मयंक जी. आपने मेरे इस चिन्तन को अपने विचारों से और बेहतरीन बना दिया.

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