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कहीं दूसरों के सामने आप भी अपने बच्चे के टेलेंट की नुमाइश तो नही कर रहे हैं ?

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अकसर कई घरों में  बचपन से लेकर आज तक मैं एक अजीब सी बात देखती आ रही हूं। हो सकता है मेरी तरह आपने भी देखा हो और इसे गलत भी समझा हो।  दरअसल ये बात है उन मासूम बच्चों की जिनके अंदर स्वाभाविक रूप से कोई खास बात होती है। मान लीजिए उसे अपनी आयु अथवा क्लास से ज्यादा कोर्स से बाहर की भी चीजें पढ़ने- लिखने आती हो, या फिर उसे गाना, डांस, कोई ख़ास गेम आम बच्चों से अधिक आता हो.  ऐसे में अकसर माता -पिता के मन में आता है कि समाज के चार लोग उसके बच्चे की उस खूबी की तारीफ़ करें. अब ऐसे में घर पर कोई मेहमान, परिचित ,रिश्तेदार अथवा अड़ोसी -पडोसी आ गये तो बात -बात में अपने बच्चे की कुछ तारीफ करेंगे. बच्चे को झट से कुछ ख़ास सुनाने को या पढने को कहेंगे. डांस करने को या गाने को कहेंगे. इतफाक से अगर बच्चे ने माता -पिता के मन के अनुरूप सुना दिया या दिखा दिया तब तो कोई बात नहीं. किन्तु अगर उनके मन के अनुरूप प्रदर्शन नही कर पायें तो खुद को शर्मिंदा होते हुए पाकर सीधा -सा आरोप मासूम बच्चे पर लगा देते हैं. मेहमान के जाने के बाद बच्चे को कसकर डांटना -पीटना अथवा कोसना भी शुरू कर देते हैं. पहले मुझे ऐसा ल...

सादा जीवन उच्च विचार, स्वस्थ तन -मन का है आधार

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एक बात हर बच्चे को बचपन से पाठ्यपुस्तक के माध्यम से या घर के बड़े-बुजुर्गों के द्वारा अवश्य पढाई जाती है – “सादा जीवन उच्च विचार”. किन्तु पता नही क्यों बच्चे जैसे –जैसे उम्र के अलग –अलग पड़ावों से गुजरते हुए जीवन में आगे बढ़ते जाते है, वैसे –वैसे ये उतम विचार ना जाने कहाँ खोते चले जाते हैं और फिर ये विचार किसी भी व्यक्ति को जीवन के उस मोड़ पर याद आता है, जब उसके जीवन में आर्थिक समस्या उत्पन्न होने लगती है. अब यहाँ पर सोचने वाली बात यह है कि अगर जीवन के शुरुआत से ही इस उतम कथन का पालन पूरा परिवार करे तो ख़ास उम्र में इसे अपनाने कि जरुरत ही नही पड़ेगी. क्योंकि जो लोग “सादा जीवन उच्च विचार” को अपने जीवन जीने का आधार बना लेते हैं, वो शुरू से ही अपने घर-परिवार, संस्था, नाते –रिश्तेदार, दोस्त –परिचित सभी को अपने विचार के अनुकूल पाने अथवा बनाने का प्रयास करते हैं. अगर कोई उनके विचार के अनुकूल नही होता है, तो ऐसे लोग चुपचाप उस व्यक्ति से किनारा कर लेते हैं या काम भर रिश्ता रखते हैं. चूँकि आज के डिजीटल युग में कोई व्यक्ति “सादा जीवन उच्च विचार” को अपनाना नही चाहता है. स्टेट्स शो करना एक बीमारी की तरह...