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जून, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बुजुर्ग हमारी धरोहर हैं

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ये सिर्फ कहने की बात नही है कि बूढ़े और बच्चे एक समान होते हैं, बल्कि ये मानव जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई भी है. बुढ़ापा को मानव जीवन संध्या काल भी कहा  जाता है. यही वो वक्त है जब बुजुर्गों को अपने बसाए हुए परिवार यानि के अपने बच्चों के प्यार व् देखभाल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. अपने अनुभव के आधार पर मैं तो कहती हूँ कि इन्हें एक छोटे बच्चे जैसी केयर की जरूरत होती है बुढ़ापे में. लेकिन आज के डिजीटल वर्ल्ड में हमारा समाज आधुनिक नही अतिआधुनिकता की होड़ में अपने ही बच्चे के केयर के लिए समय नही निकाल पा रहा है तो बूढ़े माता -पिता के लिए समय कहाँ से लाएगा? बढती हुई महंगाई ने अधिकाँश घरों में पति -पत्नी दोनों को कमाने में व्यस्त कर दिया है, जिसका सीधा बुरा असर कई घर -परिवार में बच्चों और बूढों दोनों पर ही पड़ा है. फिर भी माता -पिता होने के कारण अपने बच्चों की जिन्दगी के लिए  पति -पत्नी एड़ी -छोटी एक कर देते हैं. लेकिन इन सबके बीच कहीं ना कहीं अपने बुजुर्ग माता -पिता की इच्छाओं अथवा आवश्यकताओं को नजरअंदाज कर देते हैं. जिसका नकारात्मक प्रभाव बुजुर्ग माता -पिता पर यदि पड़ गया तो बेटे -बहु को भी ...

जो पास है वही ख़ास है

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पूरब अपने कमरे में कान में इयर फोन लगाकर मोबाइल पर व्यस्त था और बगल के कमरे से उसकी छोटी चाची उसे आवाज दे रही थी. दरअसल चाची कमरें में पलंग से टकराकर गिर गयी थीं और सर पे चोट लग गयी थी. वो मदद के लिए पूरब को आवाज देती रहीं और पूरब कान में इयर फोन लगाकर अपने जर्मनी वाले दोस्त से चैट करने में व्यस्त रहा. वो तो भला हो बिट्टू का, जो अपनी छोटी -सी गेंद को पलंग के नीचे खोजने आया तो अपनी मम्मी को गिरा देखकर भागकर पूरब के पास गया और उसे खींचकर दूसरे कमरे में लेकर आया. पूरब ने जल्दी से चाचो को सौरी कहते हुए उठाया और उनकी मलहम -पट्टी किया. बाद में जब बाकि लोग घर के आये तो सारी बात बिट्टू से जानने के बाद पूरब को अच्छी -खासी डांट लगायें.  सच पूछिए तो आज के डिजीटल वर्ल्ड में यह कोई आश्चर्य की बात नही है कि लोग पास के लोगों को नजरंदाज करने लगे हैं और इंटरनेट के माध्यम से मिलने वाले दूर के लोगों को पास समझने लगे हैं. मैं इस बात से हरगिज इंकार नही करती हूँ कि इंटरनेट ने कई बिछुड़े हुए लोगों को मिलाने में अहम भूमिका निभाई है. सोशल मीडिया पर कई अच्छे मित्र व् शुभचिंतक भी लोगों को मिले हैं. कई लोगों क...