संदेश

अप्रैल, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

छोटी-छोटी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से भी आत्मविश्वास बढ़ता है

चित्र
मनीष ग्यारवीं कक्षा का छात्र है। काफी अच्छा है वह पढ़ने में। पढ़ाई के साथ-साथ वह छोटी-बड़ी प्रतियोगिताओं में भी बराबर हिस्सा लेता रहता है। चाहे वो प्रतियोगिता उसके स्कूल में हो या रेडियो, टीवी, या फिर पत्र-पत्रिकाओं में हो, वह ज्यादातर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेता है। स्कूल में होने वाले कविता या निबंध प्रतियोगिता में तो वो हमेशा ही हिस्सा लेता है। चित्रकला प्रतियोगिता में भी हिस्सा लेता है। कई बार प्रथम पुरस्कार मिलता है तो कई बार तृतीय पुरस्कार भी नहीं मिल पाता है। मगर मनीष हौसला नहीं हारता। वो फिर से प्रयास करता है। टी.वी./ रेडियो आदि पर जितने भी इनामी प्रतियोगिता वगैरह होते हैं, उनमें भी वो बखूबी हिस्सा लेता है। कई पत्र-पत्रिकाओं में भी नाना प्रकार की प्रतियोगिता संबंधी स्तम्भ प्रकाशित होते हैं, उनमें भी वह अवश्य हिस्सा लेता है। मनीष के माता-पिता का कहना है कि, मनीष सिर्फ इनाम पाने के लिए तरह-तरह की प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लेता है, बल्कि अपनी योग्यता व काबिलियत को परखने के लिए भी हर प्रकार की प्रतियोगिता में भाग लेता है। इस प्रकार की प्रतियोगिताओं में भाग लेने से आत्मविश्वास...

रोक लो, रूठ कर उनको जाने न दो

चित्र
अक्सर यह देखने में आता है कि छोटी-सी बात पर भाई की भाई से या पति की पत्नी से बहस हो गयी और बढ़ते–बढ़ते बात इतनी बढ़ गयी कि बरसों के रिश्ते पलभर में टूट गए. अभी हाल ही की बात है. महेशजी की अपने बड़े भई से कुछ रुपयों के लेन-देन को लेकर बहस हो गई और बात इतनी बढ़ गई कि दोनों भाइयों ने रिश्ता ही तोड़ लिया. हुआ यूँ कि महेशजी की अपनी अलमारी में दो हज़ार रूपये रखे हुए थे. एक दिन महेशजी घर में नहीं थे और उनके बड़े भाई रमाकांत जी को रुपयों की जरुरत आन पड़ी, तो उन्होंने अलमारी में से छोटे भई से बगैर पूछे रूपये ले लिए. रमाकांतजी ने छोटे भाई से बगैर पूछे रूपये क्या ले लिए, छोटे भाई ने तो उन्हें चोर कह दिया और दोनों भाइयों के बीच ऐसी लड़ाई हुई कि खून के रिश्ते पलभर में टूट गए. जैसे इन दिनों भाइयों के रिश्ते पलभर में छोटी-सी बात पर टूट गए, उसी प्रकार कई और रिश्ते भी हैं, जो कभी-कभी छोटी सी बात पर टूट जाते हैं. लेकिन सच तो यह है कि छोटी- छोटी कड़वी बातों से अगर रिश्ते टूट जाते हैं तो कभी–कभी छोटी-सी मीठी व प्यारी बातों से रिश्ते टूटते-टूटते बच भी जाते हैं या यूं कह लीजिए कि टूटे हुए रिश्ते फिर से जुड़ भी जाते हैं...