संकोच त्याग कर पहल करना सीखिए
कल मिसेज शर्मा जब बाजार से पांच मीटर कपड़ा खरीद कर लायीं, तो घर में नापने पर वह कपड़ा चार मीटर सत्तर सेंटीमीटर ही निकला. दुकानदार की इस धोखेबाजी पर मिसेज शर्मा को बहुत गुस्सा आया. वे कई बार सोचीं की दुकानदार से जाकर इस बात की शिकायत करें, किंतु झिझक व संकोच के कारण कि कहीं दुकानदार ही उन्हें कुछ उल्टा- सीधा न कह दे, इसलिए वो दुकानदार के पास गयी ही नहीं यानि की मिसेज शर्मा अपने संकोची स्वभाव के कारण दुकानदार से शिकायत नहीं कर पायीं. देखा जाए तो मिसेज शर्मा की तरह कितने ही लोग अपने संकोची स्वभाव के कारण अपना छोटा- मोटा नुकसान तो क्या कभी-कभी बड़ा नुकसान भी कर बैठते हैं. कुछ लोग तो इतने संकोची होते हैं कि डॉक्टर से अपनी कुछ ख़ास बीमारियों को भी बताने से झिझकते है, कई लोग कोई नया काम धंधा शुरु तो करना चाहते हैं, किंतु संकोची मन में कई प्रकार के विचार उठने लगते हैं. कभी लगता है कि समाज क्या कहेगा? कहीं लोग मेरा मजाक तो नहीं उड़ाएंगे? इसी झिझक व संकोची स्वभाव के कारण वे कोई भी काम- धंधा ठीक से शुरू नहीं कर पाते हैं. ऐसी स्थिति में वह मानसिक तनाव से ग्रस्त हो जाते हैं, जिसका प्रभाव उनक...