पढ़ाई करने की कोई उम्र नहीं होती


हमारे देश में आज भी कई ऐसी महिलाएं हैं, जिन्हें युवावस्था में किसी कारणवश अपनी पढाई बीच में छोड़कर अर्थोपार्जन में लग जाना पड़ा या फिर उनकी शादी हो गयी. अब जबकि वो उम्र के मध्य पड़ाव (३५ -४० में ) पर पहुँच गई हैं और आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो चुकी है तो उन्हें युवावस्था में छूटी हुई पढाई को पूरा करने की इच्छा होती है किन्तु संकोच उनका रास्ता रोक देती है. उन्हें मन की बात व्यक्त करने में कभी परिवार वालों से झेंप होती है तो कभी समाज के लोगों से शरम आती है.आज मेरा ये लेख उन्ही महिलाओं के लिए है.

दरअसल सच तो यह है कि पढ़ने-लिखने की कोई उम्र सीमा नही होती है. आप किसी भी उम्र में अपनी शिक्षा पूरी कर सकती हैं. इसमें संकोच करने वाली कोई बात ही नहीं है. मेरे पड़ोस में ज्योति जी रहती हैं. इंटर करने के बाद उनकी शादी हो गयी थी. कई बार उन्होंने सोचा कि किसी प्रकार ग्रेजुएशन पूरा कर लूं. पर घर-गृहस्थी संभालने के चक्कर में कभी समय ही नहीं मिला कि पढाई कर पायें. अभी उनकी उम्र 51 वर्ष है. हाल ही में जब उनकी नई नवेली बहु को उनके मन की बात पता चली तो उसने उन्हें पहले तो मोटिवेट किया और फिर पति से बात करके अपने ही कॉलेज में उनका एडमिशन करवा दिया. सास-बहु अब साथ-साथ कॉलेज जाती हैं. बहु एम.ए. कर रही है और सास बी.ए. कर रही है. समाज के कई लोग उनसे प्रेरणा ले रहे हैं. 

सही मानिए तो आज के डिजिटल युग में पढाई करना बेहद आसान हो चुका है. घर बैठे ऑनलाइन पढाई करने के लिए कई मान्यता प्राप्त स्कूल-कॉलेज खुल चुके हैं. अब इन्टरनेट पर इस प्रकार के स्कूल-कॉलेज को खोजना भी कोई मुश्किल नहीं रह गया है. नौकरीपेशा अथवा कामकाजी महिलाएं तो ज्यादा उम्र में भी इस प्रकार की पढाई के लिए आगे आ रही है और अपना कैरियर सुदृढ़ कर रही हैं, किन्तु अधिकांश घरेलू महिलायें अभी भी उम्र ढलने पर चाहकर भी पढाई से नहीं जुड़ पा रही हैं, जो कि गलत है. यहाँ पर मैं अपनी एक निकट रिश्तेदार की बात कर रही हूँ. रिश्ते में वो मेरी मामी लगती हैं. वो किडनी की गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं और वर्तमान में ठीक से चल-फिर भी नहीं पाती हैं. उम्र यही कोई 56 के आस-पास होगी. वो कई प्रकार के ऑनलाइन कोर्स करती रहती हैं. पिछले महीने ही उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग का पूरा कोर्स खत्म किया है. घर-परिवार में उनके बच्चों को उनके अनुभव का लाभ भी मिल रहा है. बीमार होने के बाद भी उनका मन उर्जावान रहता है. 

सही मानिये तो आज हमारे देश-समाज में ऐसे महिलाओं की संख्या बढ़ रही है जो जीवन के मध्य पड़ाव पर पढ़ाई से जुड़ रही हैं किन्तु फिर भी यह संख्या कम ही है. इस संख्या को बढाने की कोशिश जारी रहनी चाहिए. ऐसी ही महिलाओं को प्रेरित करने के लिए इन दिनों सोनी टीवी पर भी एक हिंदी धारावाहिक 'Pushpa Impossible' का प्रसारण हो रहा है, जिसमे अधेड़ उम्र में पढाई करने वाली एक महिला के जीवन के उतार-चढ़ाव को बड़े ही खुबसूरत अंदाज में पेश किया जा रहा है.

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